150+ Powerful Ram Mantra – श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स (Ramayan Mantra And Shlok)

इस Article में आपको 150+ Powerful Shri Ram Mantra & Sanskrit Shlok, श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स एवं हिंदी अर्थ भी दिया है | श्री राम मंत्र इन संस्कृत (150+ Shri Ram Mantra & Sanskrit Shlok With Meaning) में अर्थ सहित बताएँगे, जिससे आप उनके अर्थ सरलता से समझ सकेंगे ||

श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स |  150+ Powerful Shri Ram Mantra | Ramayan Mantra And Shlok

यहाँ – श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स, 150+ Powerful Shri Ram Mantra Lyrics दिया गया है –

भगवान राम का नाम स्वयं में एक महामंत्र है || राम नाम की महिमा अपरंपार है || इस अतिरिक्त राम नाम का मंत्र सर्व रूप मे ग्रहण किया जाता है || इस के जप से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति सहज हो जाती है || अन्य नामो कि अपेक्षा राम नाम हजार नामों के समान है || राम मंत्र को तारक मंत्र भी कहा जाता है || इस मंत्र के जपने से सभी दुःखों का अंत होता है ||

150+ Powerful Ram Mantra – श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स (Ramayan Mantra And Shlok)
Ram Mantra: श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स (Ramayan Mantra)

एक श्लोकी रामायण – Ek Shloki Ramayan

आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम् ||
वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम् || ||
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम् ||
पश्चाद्‌ रावण कुम्भकर्ण हननम्‌, एतद्धि रामायणम् || ||

भावार्थ :- श्रीराम वनवास गए, वहां उन्होने स्वर्ण मृग का वध किया || रावण ने सीताजी का हरण कर लिया, जटायु रावण के हाथों मारा गया || श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई || श्रीराम ने बालि का वध किया || समुद्र पार किया || लंका का दहन किया || इसके बाद रावण और कुंभकर्ण का वध किया ||

श्री राम वंदना श्लोक – Shri Ram Vandana shlok

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ||
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये || ||

भावार्थ :- मैं सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर तथा रणक्रीडा में धीर, कमलनेत्र, रघुवंश नायक, करुणाकी मूर्ति और करुणा के भण्डार रुपी श्रीराम की शरण में हूं ||

श्री राम गायत्री मंत्र – Shri Ram Gayatri Mantra

ॐ दाशरथये विद्महे जानकी वल्लभाय धी महि || तन्नो रामः प्रचोदयात् ||

भावार्थ :- ॐ, दशरथ के पुत्र का ध्यान करें, माता सीता की सहमति, आज्ञा से मुझे उच्च बुद्धि और शक्ति दें, भगवान् श्री राम मेरे मस्तिस्क को बुद्धि और तेज़ से प्रकाशित करें, बुद्धि और तेज प्रदान करें ||

श्री राम ध्यान मंत्र – Shri Ram Dhyan Mantra

ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम ||
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः || ||

श्री रामाष्टक – Shri Ram Mantra in Sanskrit

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा ||
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा || ||
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते ||
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम् || ||

श्री राम मन्त्र, Ram Mantra

श्री राम का पाठ करने वाले हर साधक को जीवन में आने वाले कष्टों से राहत मिलती है || भगवान राम के आशीर्वाद साथ साथ हनुमान जी की भी कृपा बनी रहती है || हमने यहाँ पर हर परिस्थितियों के लिए राम पर श्लोक दिए है || जिसके रोजाना पढ़न से आपके जीवन के सारे कष्ट दूर होंगे ||

सौभाग्य और सुख प्राप्ति मंत्र (श्री राम मंत्र)

श्री राम जय राम जय जय राम || श्री रामचन्द्राय नमः ||
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ||
सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने || ||

गरीबी/दरिद्रता निवारण मंत्र (श्री राम मंत्र)

अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के ||
कामद धन दारिद दवारि के || ||

सफलता के लिए मंत्र (श्री राम मंत्र)

ॐ राम ॐ राम ॐ राम ह्रीं राम ह्रीं राम श्रीं राम श्रीं राम – क्लीं राम क्लीं राम || फ़ट् राम फ़ट् रामाय नमः ||

धन-प्राप्ति मंत्र (Ram Mantra)

जिमि सरिता सागर महुँ जाही || जद्यपि ताहि कामना नाहीं || ||
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ || धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ || ||

अकाल मृत्यु निवारण मंत्र:

नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट |
लोचन निजपद जंत्रित जाहि प्राण केहि बाट ||

संतान प्राप्ति मंत्र (Ram Mantra)

प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान ||
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान || ||
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट || ||

श्री राम तारक मंत्र (Ram Mantra)

ॐ जानकीकांत तारक रां रामाय नमः || ||

तारक मंत्र (श्री राम मंत्र)

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे ||
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने ॥

इस मंत्र को श्री राम तारक मंत्र भी कहा जाता है || और इसका जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु के 1000 नामों के जाप के समतुल्य है || यह मंत्र श्री राम रक्षा स्तोत्रम् के नाम से भी जाना जाता है ||

श्री राम तारक मंत्र सम्बंधित कथा:

एक बार भूतभावन भगवान शिव ने अपनी प्राणवल्लभा पार्वती जी से अपने ही साथ भोजन करने का अनुरोध किया || भगवती पार्वती जी ने यह कहकर टाला कि वे विष्णुसहस्रनाम का पाठ कर रही हैं || थोड़ी देर तक प्रतीक्षा करके शिवजी ने जब पुनः पार्वती जी को बुलाया तब भी पार्वती जी ने यही उत्तर दिया कि वे विष्णुसहस्रनाम के पाठ के विश्राम के पश्चात् ही आ सकेंगी ||

राम मन्त्र (Ram Mantra)

शिव जी को शीघ्रता थी || भोजन ठण्डा हो रहा था || अतः भगवान भूतभावन ने कहा- पार्वति! राम राम कहो || एक बार राम कहने से विष्णुसहस्रनाम का सम्पूर्ण फल मिल जाता है || क्योंकि श्रीराम नाम ही विष्णु सहस्रनाम के तुल्य है || इस प्रकार शिवजी के मुख से राम इस दो अक्षर के नाम का विष्णुसहस्रनाम के समान सुनकर राम इस द्व्यक्षर नाम का जप करके पार्वती जी ने प्रसन्न होकर शिवजी के साथ भोजन किया ||

श्री राम संस्कृत श्लोक | Shri Rama Slokas in Sanskrit | Ram Navami Slokas

जे सकाम नर सुनहि जे गावहीं ||
सुख सम्पति नाना बिधि पावहिं || ||

कवन सो काज कठिन जग माहीं || जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं || ||
राम काज लगि तव अवतारा || सुनतहिं भयउ पर्बताकारा || ||

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम ||
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम || ||

श्री राम मूल मंत्र – Shri Ram Mool Mantra

ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नम: || ||

श्री राम बीज मंत्र Shri Ram Beej Mantra
“राम”

भगवान श्री राम का तारक मंत्र – Shri Ram Ka Tarak Mantra

श्री राम का तारक मंत्र : देता है अपार सुख और सौभाग्य

श्री राम, जय राम, जय जय राम !! ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ ||
॥ राम राम राम राम नाम तारकम्राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम् ॥

॥ जानकी मनोहरम सर्वलोक नायकम् जानकी मनोहरम सर्वलोक नायकम् ॥
॥ शङ्करादि सेव्यमान पुण्यनाम कीर्तनम् शङ्करादि सेव्यमान पुण्यनाम कीर्तनम् ॥

राम तारक मन्त्र (Ram Mantra)

॥ राम राम राम राम नाम तारकम्राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम् ॥
॥ वीरशूर वन्दितं रावणादि नाशकम् वीरशूर वन्दितं रावणादि नाशकम् ॥

॥ आञ्जनेय जीवनाम राजमन्त्र रुपकम् आञ्जनेय जीवनाम राजमन्त्र रुपकम् ॥
॥ राम राम राम राम नाम तारकम्राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम् ॥

श्री राम तारक मंत्र, Shri Ram tarak Mantra

ॐ जानकीकांत तारक रां रामाय नमः॥

सफलता प्राप्ति श्री राम मंत्र, Safalta Prapti ke liye Shri Ram Mantra

  1. ॐ राम ॐ राम ॐ राम ||
  2. ह्रीं राम ह्रीं राम ||
  3. श्रीं राम श्रीं राम ||
  4. क्लीं राम क्लीं राम ||
  5. फ़ट् राम फ़ट् ||
  6. रामाय नमः ||
  7. श्री रामचन्द्राय नमः ||
  8. श्री राम शरणं मम् ||
  9. ॐ रामाय हुँ फ़ट् स्वाहा ||
  10. श्री राम जय राम जय जय राम ||
  11. राम राम राम राम रामाय राम ||
  12. ॐ श्री रामचन्द्राय नम :

श्री राम ध्यान मंत्र, Dhyan Shri Ram Mantra

ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम , लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !

श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे , रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नम:

श्री राम गायत्री मंत्र, Gayatri Shri Ram Mantra

ॐ दाशरथये विद्महे जानकी वल्लभाय धी महि॥ तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥

श्री राम मूल मंत्र, Shri Ram Mool Mantra

  • ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥

श्री राम मंत्र, Shri Ram Mantra

  • ॐ रां रामय नमः ||
  • ॐ रामाय नमः ||

दशाक्षर श्री राम मंत्र, 10 Ashkari Shri Ram Mantra

हुं जानकी वल्लभाय स्वाहा ||

कार्य में सफलता पाने के लिए श्री राम मंत्र ( Ram Mantra)

ॐ राम ॐ राम ॐ राम ||

ह्रीं राम ह्रीं राम ||

श्रीं राम श्रीं राम ||

रामाय नमः ||

Ram Mantra: सर्वार्थसिद्धि श्री राम ध्यान मंत्र-

ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम ! श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !

किसी संकट में सहायता हेतु राम मंत्र

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् || कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥ — आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् || लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् || ||

ग्रह क्लेश निवारण और सुख संपत्ति दायक राम मन्त्र (Ram Mantra)

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा || गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥ हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते || बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥

सफलता के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

ॐ राम ॐ राम ॐ राम ह्रीं राम ह्रीं राम श्रीं राम श्रीं राम – क्लीं राम क्लीं राम || फ़ट् राम फ़ट् रामाय नमः ||

प्रतिदिन प्रभु के स्मरण हेतु-

|| श्री राम जय राम जय जय राम ||

मनोकामना पूर्ति हेतु राम मन्त्र (Ram Mantra)

|| श्री रामचन्द्राय नमः ||

विपत्ति में रक्षा हेतु राम मन्त्र (Ram Mantra)

|| राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे || सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ||

मुक्ति और प्रभु प्रेम हेतु राम मन्त्र (Ram Mantra)

नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट |
लोचन निजपद जंत्रित जाहि प्राण केहि बाट ||

Ramyan se Ram Mantra | वाल्मीकि रामायण में राम मन्त्र एवं श्लोक

150+ Powerful Ram Mantra – श्री राम मंत्र और श्लोक लिरिक्स (Ramayan Mantra And Shlok)
Ramyan se Ram Mantra, वाल्मीकि रामायण में राम मन्त्र एवं श्लोक

रामायण ऋषि वाल्मीकि द्वारा लिखित एक महान संस्कृत महाकाव्य कविता है || रामायण में 24,000 श्लोक हैं जो सात पुस्तकों और 500 सर्गों में विभाजित हैं || राम और अयन के संयोग से रामायण शब्द बनता है जिसका अर्थ है भगवान राम की यात्रा || भगवान राम को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है ||

राम मन्त्र (Ram Mantra)

हिंदुओं के लिए रामायण एक महान धार्मिक ग्रंथ है || यह व्यापक रूप से माना जाता है कि रामायण का पाठ करने से परिवार में शांति और समृद्धि आती है || संपूर्ण रामायण का पाठ करने में कुछ दिन लग सकते हैं और कई बार समय की कमी के कारण एक ही बैठक में पूरी रामायण का पाठ करना संभव नहीं है ||

Ramyan se Ram Mantra, रामायण में राम मन्त्र एवं श्लोक

नामा रामायणम् संस्कृत में ऋषि वाल्मीकि द्वारा लिखित महाकाव्य रामायण का संक्षिप्त रूप है || नाम रामायणम में 108 श्लोक हैं और रामायण को पूरा करने के समान, नाम रामायणम में सात अध्याय हैं जो बालकंदह, अयोध्याकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, युद्धकांड और उत्तराखंड में विभाजित हैं ||

नामा रामायणम दक्षिण भारतीय राज्यों में बहुत लोकप्रिय है || तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में क्रमशः तमिल नाम रामायणम, तेलुगु नाम रामायणम, कन्नड़ नाम रामायण और मलयालम नाम रामायणम बहुत लोकप्रिय हैं ||

Ramyan se Ram Mantra, रामायण में राम मन्त्र एवं श्लोक

हिंदी भाषी क्षेत्रों में रामचरितमानस की लोकप्रियता के कारण, नामा रामायणम उत्तर भारतीय राज्यों में कम लोकप्रिय है || यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नाम रामायण हिंदी की अवधी बोली में संत तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस का संक्षिप्त संस्करण नहीं है ||

एक श्लोकी रामायणम भी है, जिसमें एक ही श्लोक में संपूर्ण महाकाव्य रामायण का वर्णन किया गया है ||

बालकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

शुद्धब्रह्मपरात्पर राम्॥१॥

कालात्मकपरमेश्वर राम्॥२॥

शेषतल्पसुखनिद्रित राम्॥३॥

ब्रह्माद्यामरप्रार्थित राम्॥४॥

चण्डकिरणकुलमण्डन राम्॥५॥

श्रीमद्दशरथनन्दन राम्॥६॥

कौसल्यासुखवर्धन राम्॥७॥

विश्वामित्रप्रियधन राम्॥८॥

घोरताटकाघातक राम्॥९॥

मारीचादिनिपातक राम्॥१०॥

कौशिकमखसंरक्षक राम्॥११॥

श्रीमदहल्योद्धारक राम्॥१२॥

गौतममुनिसम्पूजित राम्॥१३॥

सुरमुनिवरगणसंस्तुत राम्॥१४॥

नाविकधावितमृदुपद राम्॥१५॥

मिथिलापुरजनमोहक राम्॥१६॥

विदेहमानसरञ्जक राम्॥१७॥

त्र्यम्बककार्मुकभञ्जक राम्॥१८॥

सीतार्पितवरमालिक राम्॥१९॥

कृतवैवाहिककौतुक राम्॥२०॥

भार्गवदर्पविनाशक राम्॥२१॥

श्रीमदयोध्यापालक राम्॥२२॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

अयोध्याकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

अगणितगुणगणभूषित राम्॥२३॥

अवनीतनयाकामित राम्॥२४॥

राकाचन्द्रसमानन राम्॥२५॥

पितृवाक्याश्रितकानन राम्॥२६॥

प्रियगुहविनिवेदितपद राम्॥२७॥

तत्क्षालितनिजमृदुपद राम्॥२८॥

भरद्वाजमुखानन्दक राम्॥२९॥

चित्रकूटाद्रिनिकेतन राम्॥३०॥

दशरथसन्ततचिन्तित राम्॥३१॥

कैकेयीतनयार्थित राम्॥३२॥

विरचितनिजपितृकर्मक राम्॥३३॥

भरतार्पितनिजपादुक राम्॥३४॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

अरण्यकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

दण्डकवनजनपावन राम्॥३५॥

दुष्टविराधविनाशन राम्॥३६॥

शरभङ्गसुतीक्ष्णार्चित राम्॥३७॥

अगस्त्यानुग्रहवर्धित राम्॥३८॥

गृध्राधिपसंसेवित राम्॥३९॥

पञ्चवटीतटसुस्थित राम्॥४०॥

शूर्पणखार्तिविधायक राम्॥४१॥

खरदूषणमुखसूदक राम्॥४२॥

सीताप्रियहरिणानुग राम्॥४३॥

मारीचार्तिकृदाशुग राम्॥४४॥

विनष्टसीतान्वेषक राम्॥४५॥

गृध्राधिपगतिदायक राम्॥४६॥

शबरीदत्तफलाशन राम्॥४७॥

कबन्धबाहुच्छेदक राम्॥४८॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

किष्किन्धाकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

हनुमत्सेवितनिजपद राम्॥४९॥

नतसुग्रीवाभीष्टद राम्॥५०॥

गर्वितवालिसंहारक राम्॥५१॥

वानरदूतप्रेषक राम्॥५२॥

हितकरलक्ष्मणसंयुत राम्॥५३॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

सुन्दरकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

कपिवरसन्ततसंस्मृत राम्॥५४॥

तद्‍गतिविघ्नध्वंसक राम्॥५५॥

सीताप्राणाधारक राम्॥५६॥

दुष्टदशाननदूषित राम्॥५७॥

शिष्टहनूमद्‍भूषित राम्॥५८॥

सीतावेदितकाकावन राम्॥५९॥

कृतचूडामणिदर्शन राम्॥६०॥

कपिवरवचनाश्वासित राम्॥६१॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

युद्धकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

रावणनिधनप्रस्थित राम्॥६२॥

वानरसैन्यसमावृत राम्॥६३॥

शोषितसरिदीशार्थित राम्॥६४॥

विभीषणाभयदायक राम्॥६५॥

पर्वतसेतुनिबन्धक राम्॥६६॥

कुम्भकर्णशिरच्छेदक राम्॥६७॥

राक्षससङ्घविमर्दक राम्॥६८॥

अहिमहिरावणचारण राम्॥६९॥

संहृतदशमुखरावण राम्॥७०॥

विधिभवमुखसुरसंस्तुत राम्॥७१॥

खस्थितदशरथवीक्षित राम्॥७२॥

सीतादर्शनमोदित राम्॥७३॥

अभिषिक्तविभीषणनत राम्॥७४॥

पुष्पकयानारोहण राम्॥७५॥

भरद्वाजादिनिषेवण राम्॥७६॥

भरतप्राणप्रियकर राम्॥७७॥

साकेतपुरीभूषण राम्॥७८॥

सकलस्वीयसमानत राम्॥७९॥

रत्नलसत्पीठास्थित राम्॥८०॥

पट्टाभिषेकालङ्कृत राम्॥८१॥

पार्थिवकुलसम्मानित राम्॥८२॥

विभीषणार्पितरङ्गक राम्॥८३॥

कीशकुलानुग्रहकर राम्॥८४॥

सकलजीवसंरक्षक राम्॥८५॥

समस्तलोकाधारक राम्॥८६॥

उत्तरकाण्ड में राम मन्त्र एवं श्लोक

आगतमुनिगणसंस्तुत राम्॥८७॥

विश्रुतदशकण्ठोद्भव राम्॥८८॥

सीतालिङ्गननिर्वृत राम्॥८९॥

नीतिसुरक्षितजनपद राम्॥९०॥

विपिनत्याजितजनकज राम्॥९१॥

कारितलवणासुरवध राम्॥९२॥

स्वर्गतशम्बुकसंस्तुत राम्॥९३॥

स्वतनयकुशलवनन्दित राम्॥९४॥

अश्वमेधक्रतुदीक्षित राम्॥९५॥

कालावेदितसुरपद राम्॥९६॥

आयोध्यकजनमुक्तिद राम्॥९७॥

विधिमुखविबुधानन्दक राम्॥९८॥

तेजोमयनिजरूपक राम्॥९९॥

संसृतिबन्धविमोचक राम्॥१००॥

धर्मस्थापनतत्पर राम्॥१०१॥

भक्तिपरायणमुक्तिद राम्॥१०२॥

सर्वचराचरपालक राम्॥१०३॥

सर्वभवामयवारक राम्॥१०४॥

वैकुण्ठालयसंस्थित राम्॥१०५॥

नित्यानन्दपदस्थित राम्॥१०६॥

राम् राम् जय राजा राम्॥१०७॥

राम् राम् जय सीता राम्॥१०८॥

राम् राम् जय राजा राम् ||

राम् राम् जय सीता राम्॥

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यदि पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा के साथ किसी भी शास्त्र के मंत्र या चौपाई का उपयोग किया जाए तो फल प्राप्ति की संभावना शत-प्रतिशत है || रोग निवारण, भय व शत्रु से मुक्ति के मंत्र से साधक में एक अनोखी शक्ति एवं साहस, समस्या-समाधान करने की सूझ-बूझ व विवेक, बुद्धि और प्रयत्न, परिश्रम व संघर्ष करने की प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है, जिससे अनुकूल फलों की प्राप्ति होती है || श्री गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरितमानस के कुछ मंत्र पाठकों के उपयोगार्थ प्रस्तुत हैं ||

राम मन्त्र (Ram Mantra)

इनमें से जो मंत्र जप करना हो, उसके लिए हवन करना आवश्यक है || हवन कुंड बनाकर उसमें अग्रि प्रज्ज्वलित कर दें और नीचे दी गई 16 वस्तुओं में से कम से कम 8 वस्तुओं से 108 आहूतियां देकर मंत्र को सिद्ध कर लेना चाहिए || हवन तो सिर्फ एक बार ही करना होता है लेकिन मंत्र जप रोजाना 108 बार करना आवश्यक है, इससे इष्टफल की प्राप्ति संभव होती है ||

राम मन्त्र (Ram Mantra)

हवन के लिए आवश्यक वस्तुएं : चंदन का बूरा, तिल, घी, दाल, अगर, तगर, कपूर, शुद्ध केसर, नागर मोथा, जव, चावल, पंचमेवा, पिस्ता, बादाम, अंगूर, काजू || इनमें से कम से कम 8 वस्तुएं आवश्यक हैं ||

मानसिक शांति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

रामचरण दृढ़ प्रीति करि बालि कीन्हें तनु त्याग ||
सुमन माल जिभि कुंठ ते गिरन न जावई बाग || ||

संकटनाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

जो प्रभु दीनदयालु कहावा || आरति हरन बेद जसु गावा || ||
जपति नामु जन आरत भारी || मिटङ्क्षह कुसंकट होहीं सुखारी || ||
दीनदयाल बिरिदु संभारी || हरहुनाथ मम संकट भारी || ||

रक्षामंत्र राम मन्त्र (Ram Mantra)

मामभिरक्षय रघुकुलनायक ||
घृतवरचाप रुचिकर सायक || ||

विपत्तिनाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

राजीवनयन धरे धनुसायक ||
भगत विपत्तिभंजन सुखदायक || ||

क्लेश नाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

हरन कठिन कलि कलुष कलेसू ||
महामोह निसि दलन दिनेसू ||

विघ्न शांति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

सकल विघ्न व्यापहि नहीं तेही ||
राम सुकृपा विलोकहिं जेही || ||

दु:खनाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

जब ते समु व्याहि घर आए ||
नित नव मंगल मोद बधाए ||

महामारी से रक्षा के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

जय रघुबंस बनज बनभानू ||
गहन दनुज कुल दहन कृसानू || ||

रोग तथा उपद्रव शांति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

दैहिक दैविक भौतिक तापा ||
रामराज नहीं काहुहि व्यापा || ||

अकाल मृत्यु निवारण के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

नाम पाहस दिवस निसि ध्यान तुम्हारा कपाट ||
लोचन निज पढज़ंत्रित जाङ्क्षह प्रान केहिं बाट || ||

नजर न लगने के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी ||
ताकर नाम भरत आस होई ||

दारिद्रय नाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के ||
कामद धन दारिद्र दबारि के || ||

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

जिमि सरिता सागर महुं जाही || जद्यपि ताहि कामना नाही || ||
तिमि सुख सम्पत्ति बिनहि बालाएं || धरम सील पहि जाहि सुभाएं ||

पुत्र प्राप्ति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

प्रेम मगन कौशल्या निसि दिन जात न जान ||
सुख स्नेह बस माता बालचरित कर गान || ||

संपत्ति लाभ के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

जे सकाम नर सुनही जे गावहि ||
सुख संपत्ति नाना विधि पावहि || ||

सुख प्राप्ति के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

सुनहि विमुक्त बिरत अरु विषई ||
लहहि भगति गति संपत्ति नई || ||

मनोरथ सिद्धि के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहि जे नर अरू नारि ||
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिपुरारि || ||

शत्रुनाश के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

बयरु न कर काहू सन कोई ||
राम प्रताप विषमता खोई || ||

विवाह के लिए राम मन्त्र (Ram Mantra)

तब जनक पाई वसिष्ठ आयसु ब्याह साज संवारि कै ||
मांडवी श्रुतकी रति उरमिला कूंअरी लई हंकारी कै || ||


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जीवन में हर प्रकार के सुख और एश्वर्य की प्राप्ति हेतु इस बीज मंत्र द्वारा भगवान श्री विष्णु की आराधना करनी चाहिए। भगवान श्री राम का बीज मंत्र “रीं” है। रीं रामाय नमः।

श्री रामचन्द्राय नमः । ३. राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ।।

‘श्री राम जय राम जय जय राम’ – यह सात शब्दों वाला तारक मंत्र है। साधारण से दिखने वाले इस मंत्र में जो शक्ति छिपी हुई है, वह अनुभव का विषय है। इसे कोई भी, कहीं भी, कभी भी कर सकता है। फल बराबर मिलता है।

  1. श्रीरामचन्द्राय नम:।
  2. रामाय नम:।
  3. ह्रीं राम ह्रीं राम।
  4. क्लीं राम क्लीं राम।
  5. फट् राम फट्।
  6. श्रीं राम श्रीं राम।
  7. ॐ राम ॐ राम ॐ राम।
  8. श्रीराम शरणं मम्।
  9. ॐ रामाय हुं फट् स्वाहा।
  10. ‘श्रीराम, जयराम, जय-जय राम’।

आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम् ||
वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम् || ||
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम् ||
पश्चाद्‌ रावण कुम्भकर्ण हननम्‌, एतद्धि रामायणम् || ||


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पवन शास्त्री ( सुर सरिता भजन )

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