Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics

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शिव चालीसा लिरिक्स |  Shiv Chalisa Lyrics In Hindi

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics
Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

|| शिव चालीसा लिरिक्स | Shiv Chalisa Lyrics ||

यहाँ शिव चालीसा लिरिक्सShiv Chalisa Lyrics In Hindi दिया गया है –

शिव चालीसा लिरिक्स दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान |
कहत अयोध्या-दास तुम, देहु अभय वरदान ||

शिव चालीसा लिरिक्स चौपाई –

जय गिरिजा पति दीन दयाला | सदा करत संतन प्रतिपाला ||
भाल चन्द्रमा सोहत नीकै | कानन कुण्डल नागफनी कै ||

अंग गौर शिर गंग बहाए | मुण्ड-माल तन क्षार लगाये ||
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहै | छवि को देखि नाग मन मोहै ||

मैना मातु की हवे दुलारी | बाम अंग सोहत छवि न्यारी ||
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी | करत सदा शत्रुन क्षयकारी ||

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे | सागर मध्य कमल हैं जैसे ||
कार्तिक श्याम और गणराऊ | या छवि को कहि जात न काऊ ||

देवन जबहीं जाय पुकारा | तब ही दुख प्रभु आप निवारा ||
किया उपद्रव तारक भारी | देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ||

तुरत षडानन आप पठायउ | लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ||
आप जलंधर असुर संहारा | सुयश तुम्हार विदित संसारा ||

त्रिपुरा-सुर सन युद्ध मचायी | सबहिं कृपा कर लीन बचायी ||
किया तपहिं भागीरथ भारी | पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ||

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं | सेवक स्तुति करत सदाहीं ||
वेद नाम महिमा तव गायी | अकथ अनादि भेद नहिं पायी ||

Shiv Chalisa Lyrics In Hindi

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला | जरत सुरासुर भये विहाला ||
कीन्ही दया तहं करी सहायी | नीलकण्ठ तब नाम कहायी ||

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा | जीत के लंक विभीषण दीन्हा ||
सहस कमल में हो रहे धारी | कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ||

एक कमल प्रभु राखेउ जोयी | कमल नयन पूजन चहं सोयी ||
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर | भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ||

जय जय जय अनन्त अविनाशी | करत कृपा सब के घटवासी ||
दुष्ट सकल नित मोहि सतावे | भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवे ||

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो | येहि अवसर मोहि आन उबारो ||
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो | संकट से मोहि आन उबारो ||

मात-पिता भ्राता सब होई | संकट में पूछत नहिं कोई ||
स्वामी एक है आस तुम्हारी | आय हरहु मम संकट भारी ||

धन निर्धन को देत सदा हीं | जो कोई जांचे सो फल पाहीं ||
स्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी | क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ||

शंकर हो संकट के नाशन | मंगल कारण विघ्न विनाशन ||
योगी यति मुनि ध्यान लगावे | शारद नारद शीश नवावे ||

नमो नमो जय नमः शिवाय | सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ||
जो यह पाठ करे मन लायी | ता पर होत है शम्भु सहायी ||

Shiv Chalisa Lyrics In Hindi

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी | पाठ करे सो पावन हारी ||
पुत्र हीन कर इच्छा जोयी | निश्चय शिव प्रसाद तेहि होयी ||

पण्डित त्रयोदशी को लावै | ध्यान पूर्वक होम करावै ||
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा | ताके तन नहीं रहै कलेशा ||

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै | शंकर सम्मुख पाठ सुनावै ||
जन्म जन्म के पाप नसावै | अन्त धाम शिवपुर में पावै ||

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी | जानि सकल दुःख हरहु हमारी ||

शिव चालीसा लिरिक्स दोहा :-

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा |
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ||

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान |
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ||Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

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Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स


Shiv Chalisa Lyrics Meaning in Hindi | श्री शिव चालीसा का हिन्दी अनुवाद

||दोहा ||

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ||

अर्थ- पार्वती सुत, समस्त मंगलो के ज्ञाता श्री गणेश की जय हो। मैं अयोध्यादास आपसे वरदान मांगता हूँ।

||चौपाई ||

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला ||

अर्थ- पार्वतीजी के स्वामी, आपकी जय हो! आप दीन लोगों पर कृपा करते हैं और साधु-संतजनों की रक्षा करते हैं।

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के ||

अर्थ- हे त्रिशूलधारी, नीलकण्ठ! आपके मस्तक पर चन्द्रमा सुशोभित है औ कानो में नागफनी के कुण्डल शोभायमान हैं।

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए ||

अर्थ- आप गौर वर्णी हैं और सिर की जटाओं में गंगाजी बह रही हैं, गले में मूण्डों की माला है और शरीर पर भस्म लगा रखी है।

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे ||

अर्थ- हे त्रिलोकी! आपके वस्त्र बाघ की खाल के हैं। आपकी शोभा को देखकर नाग और मुनिजन मोहित हो रहे हैं।

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी ||

अर्थ- माता मैना की प्रिय पुत्री पार्वतीजी आपके बाईं ओर सुशोभित हैं इनकी शोभा अत्यंत निराली और न्यारी है।

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ||

अर्थ- आपके हाथ में त्रिशल अपनी उत्तम छवि से शोभामान हो रहा है जिससे आप सदैव शत्रुओं का संहार करते रहते हैं।

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ||

अर्थ- आपके पास आपका वाहन नन्दी और गणेशजी कुछ इस प्रकार शोभायमान हो रहे हैं जैसे समुद्र के बीच में कमल खिले हों।

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ ||

अर्थ- कार्तिकेयजी और उनके गण वहां पर विराजमान हैं। इस दृश्य की शोभा का वर्णन कोई नहीं कर सकता।

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा ||

अर्थ- हे त्रिपुरारी! देवताओं ने जब भी सहायता की पुकार की, हे नाथ! आपने बिना विलम्ब किए उनके दु:ख दूर किए।

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ||

अर्थ- जब ताड़कासुर ने बहुत अत्याचार करने आरंभ किए तो सभी देवताओं ने आपसे रक्षा करने की प्रार्थना की।

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ||

अर्थ- आपने उसी समय कार्तिकेयजी को वहां भेजा और उन्होने पलक झपकने की देरी में उस राक्षस को मार गिराया।

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा ||

अर्थ- आपने जलंधर नामक भयंकर राक्षस का संहार किया। उससे आपका जो यश फैला उससे सारा संसार परिचित है।

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई ||

अर्थ- त्रिपुर नामक राक्षस से युद्ध करके आपने सभी देवताओं पर कृपा की और उनको उस दुष्ट के आतंक से मुक्त किया।

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ||

अर्थ- राजा भगीरथ के तप के बाद आपने अपनी जटाओं में वास करती गंगा को जाने की आज्ञा दी। भगीरथ की प्रतिज्ञा आपके कारण ही पूरी हुई।

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं ||

अर्थ- आपकी बराबरी करने वाला कोई दानी नहीं है। भक्त लोग सदा ही आपका गुणगान व यशोगान करते रहते हैं।

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ||

अर्थ- वेदों में भी आपकी महिमा का वर्णन है। परंतु अनादि होने के कारण आपका रहस्य कोई भी नहीं पा सका।

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला ||

अर्थ- समुद्र मंथन से जो विषरूपी ज्वाला निकली उससे देवता और राक्षस दोनों जलने लगे और विह्वल हो गए।

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई ||

अर्थ- हे नीलकंठ! तब आपने उस ज्वालारूपी विष का पान करके उनकी सहायता की। तभी से आपका नाम नीलकंठ पड़ गया।

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा ||

अर्थ- लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व श्रीराम ने आपकी पूजा के बाद ही विजय प्राप्त की और विभीषण को लंका का राजा बना दिया।

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ||

अर्थ- हे महादेव! जब श्री रामचन्द्रजी सहस्त्र कमलों से आपकी पूजा कर रहे थे तब आपने फूलों में रहकर उनकी परीक्षा ली।

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई ||

अर्थ- आपने अपनी माया से एक कमल का फूल छिपा दिया। तब रामचन्द्रजी ने नयनरूपी कमल से पूजा करने की बात सोची।

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ||

अर्थ- इस प्रकार जब शिवजी ने अपने में रामचन्द्रजी की यह दृढ़ आस्था देखी तब आपने प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दिया।

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी ||

अर्थ- हे शिव आप अनन्त हैं, अनश्वर हैं। आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप सबके हृदय में रहकर उन पर कृपा करते हैं।

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ||

अर्थ- दुष्ट विचार सदैव मुझे पीड़ित कर सताते रहते हैं और मैं भ्रमित रहता हूं जिसके कारण मुझे कहीं चैन नहीं मिलता है।

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो ||

अर्थ- हे नाथ! मेरी रक्षा करो, मेरी रक्षा करो- इस प्रकार मैं आपको पुकार रहा हूं। आप आकर मुझे संकटों व कष्टो से उबारें।

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो ||

अर्थ- हे पापसंहारक! अपने त्रिशूल से मेरे शत्रुओं को नष्ट करो और संकट से मेरा उद्धार कर मुझे भवसागर से पार लगाओ।

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई ||

अर्थ- माता-पिता, भाई-बंधु सब सुख के साथी हैं। दुखों में कोई साथ नहीं देता, संकट आने पर कोई नहीं पूछता।

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी ||

अर्थ- हे स्वामी! मुझे तो केवल आपसे ही आशा है, आप पर ही विश्वास है। आप आकर मेरा घोर संकट तथा कष्ट दूर करें।

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं ||

अर्थ- आप सदा निर्धनों की धन द्वारा सहायता करते हैं। आपसे जिस फल की कामना की जाती है वही फल प्राप्त होता है।

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ||

अर्थ- आपकी पूजा-अर्चना कैसे की जाती है, हमें तो यह भी मालूम नहीं। अतः हमारी जो भी भूल-चूक हुई हो उसे क्षमा कर दें।

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन ||

अर्थ- आप ही कष्टों को नष्ट करने वाले हैं। सभी शुभ कार्यो को कराने वाले हैं तथा सब विध्न-बाधाओं को दूर करके कल्याण करते हैं।

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं ||

अर्थ- योगी, यति और मुनि सभी आपका ध्यान करते हैं। नारद मुनि और देवी सरस्वती (शारदा) भी आपको नमन करते हैं।

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ||

अर्थ- ‘ॐ नमः शिवाय’ इस पञ्चाक्षर मंत्र का जाप करके भी ब्रह्मा आदि देवता आपकी महिमा का पार नहीं प सके।

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई ||

अर्थ- जो कोई भी मन तथा निष्ठा से शिव चालीसा का पाठ करता है, शंकर भगवान उसकी सहायता कर उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी ||

अर्थ- हे करुणानिधान! कर्ज के बोझ से दबा हुआ वयक्ति आपके नाम का जाप करे तो वह ऋण-मुक्त हो सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ||

अर्थ- जो कोई भक्त पुत्र प्राप्ति की कामना से पाठ करता है, तो आपकी क्रिपा से उसे पुत्र-रत्न की प्राप्ति होती है।

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ||

अर्थ- हर श्रद्धालु तथा भक्त ओ प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को विद्वान पण्डित को बुलाकर पूजा तथा हवन करवाना चाहिए।

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा ||

अर्थ- जो भक्त सदैव त्रयोदशी का व्रत करता है, उसके शरीर में कोई रोग नहीं रहता और किसी प्रकार का क्लेश भी मन में नहीं रहता।

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ||

अर्थ- धूप-दीप और नैवेध से पूजन करके शिवजी की मूर्ति या चित्र के सम्मुख बैठकर शिव चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए।

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे ||

अर्थ- इससे जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में मनुष्य शिवलोक में वास करने लगता है अथार्त मुक्त हो जाता है।

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी ||

अर्थ- अयोध्यादासजी कहते हैं कि शंकर भगवान, हमें आपसे ही आशा है। आप हमारी मनोकामनाएं पूरी करके हमारे दुखों को दूर करें।

||दोहा ||

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ||

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।

अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ||

अर्थ- इस शिव चालीसा का चालीस बार प्रतिदिन पाठ करने से भगवान मनोकामना पूर्ण करते हैं। मृगशिर मास कि छ्ठी तिथि हेमंत ऋतु संवत ६४ में यह चालीसा रूपी शिव स्तुति लोक कल्याण के लिए पूर्ण हुई ।Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स


Shiv Chalisa Lyrics In English | Shiv Chalisa Lyrics

In this article, you are also being given the Hindi and English lyrics of Shiv Chalisa Lyrics In English, Jai Girija Pati Dinadayala Lyrics and I hope that Shiv Chalisa Lyrics In EnglishJai Girija Pati Dinadayala Lyrics.

Here you can read Shiv Chalisa Lyrics Jai Girija Pati Dinadayala Lyrics

Shiv Chalisa Lyrics Doha –

jay ganesh girija suvan, mangal mool sujaan |
kahat ayodhya-daas tum, dehu abhay varadaan ||

Shiv Chalisa Lyrics Chaupai –

jay girija pati deen dayaala | sada karat santan pratipaala ||
bhaal chandrama sohat neekai | kaanan kundal naagaphanee kai ||

ang gaur shir gang bahae | mund-maal tan kshaar lagaaye ||
vastr khaal baaghambar sohai | chhavi ko dekhi naag man mohai ||

maina maatu kee have dulaaree | baam ang sohat chhavi nyaaree ||
kar trishool sohat chhavi bhaaree | karat sada shatrun kshayakaaree ||

nandi ganesh sohai tahan kaise | saagar madhy kamal hain jaise ||
kaartik shyaam aur ganaraoo | ya chhavi ko kahi jaat na kaoo ||

devan jabaheen jaay pukaara | tab hee dukh prabhu aap nivaara ||
kiya upadrav taarak bhaaree | devan sab mili tumahin juhaaree ||

turat shadaanan aap pathaayu | lavanimesh mahan maari giraayu ||
aap jalandhar asur sanhaara | suyash tumhaar vidit sansaara ||

tripura-sur san yuddh machaayee | sabahin krpa kar leen bachaayee ||
kiya tapahin bhaageerath bhaaree | purab pratigya taasu puraaree ||

daanin mahan tum sam kou naaheen | sevak stuti karat sadaaheen ||
ved naam mahima tav gaayee | akath anaadi bhed nahin paayee ||

prakatee udadhi manthan mein jvaala | jarat suraasur bhaye vihaala ||
keenhee daya tahan karee sahaayee | neelakanth tab naam kahaayee ||

poojan raamachandr jab keenha | jeet ke lank vibheeshan deenha ||
sahas kamal mein ho rahe dhaaree | keenh pareeksha tabahin puraaree ||

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics
Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

Shiv Chalisa Lyrics In English

ek kamal prabhu raakheu joyee | kamal nayan poojan chahan soyee ||
kathin bhakti dekhee prabhu shankar | bhe prasann die ichchhit var ||

jay jay jay anant avinaashee | karat krpa sab ke ghatavaasee ||
dusht sakal nit mohi sataave | bhramat rahaun mohi chain na aave ||

traahi traahi main naath pukaaro | yehi avasar mohi aan ubaaro ||
lai trishool shatrun ko maaro | sankat se mohi aan ubaaro ||

maat-pita bhraata sab hoee | sankat mein poochhat nahin koee ||
svaamee ek hai aas tumhaaree | aay harahu mam sankat bhaaree ||

dhan nirdhan ko det sada heen | jo koee jaanche so phal paaheen ||
stuti kehi vidhi karain tumhaaree | kshamahu naath ab chook hamaaree ||

shankar ho sankat ke naashan | mangal kaaran vighn vinaashan ||
yogee yati muni dhyaan lagaave | shaarad naarad sheesh navaave ||

namo namo jay namah shivaay | sur brahmaadik paar na paay ||
jo yah paath kare man laayee | ta par hot hai shambhu sahaayee ||

rniyaan jo koee ho adhikaaree | paath kare so paavan haaree ||
putr heen kar ichchha joyee | nishchay shiv prasaad tehi hoyee ||

pandit trayodashee ko laavai | dhyaan poorvak hom karaavai ||
trayodashee vrat karai hamesha | taake tan nahin rahai kalesha ||

Shiv Chalisa Lyrics In English

dhoop deep naivedy chadhaavai | shankar sammukh paath sunaavai ||
janm janm ke paap nasaavai | ant dhaam shivapur mein paavai ||

kahain ayodhyaadaas aas tumhaaree | jaani sakal duhkh harahu hamaaree ||

Shiv Chalisa Lyrics doha :-

nitt nem kar praatah hee, paath karaun chaaleesa |
tum meree manokaamana, poorn karo jagadeesh ||

magasar chhathi hemant rtu, sanvat chausath jaan |
astuti chaaleesa shivahi, poorn keen kalyaan ||


Shiv Chalisa Lyrics Meaning in English Font

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics
Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

||doha ||

jay ganesh girija suvan, mangal mool sujaan.

kahat ayodhyaadaas tum, dehu abhay varadaan ||

arth- paarvatee sut, samast mangalo ke gyaata shree ganesh kee jay ho. main ayodhyaadaas aapase varadaan maangata hoon.

||chaupaee ||

jay girija pati deen dayaala. sada karat santan pratipaala ||

arth- paarvateejee ke svaamee, aapakee jay ho! aap deen logon par krpa karate hain aur saadhu-santajanon kee raksha karate hain.

bhaal chandrama sohat neeke. kaanan kundal naagaphanee ke ||

arth- he trishooladhaaree, neelakanth! aapake mastak par chandrama sushobhit hai au kaano mein naagaphanee ke kundal shobhaayamaan hain.

ang gaur shir gang bahaaye. mundamaal tan kshaar lagae ||

arth- aap gaur varnee hain aur sir kee jataon mein gangaajee bah rahee hain, gale mein moondon kee maala hai aur shareer par bhasm laga rakhee hai.

vastr khaal baaghambar sohe. chhavi ko dekhi naag man mohe ||

arth- he trilokee! aapake vastr baagh kee khaal ke hain. aapakee shobha ko dekhakar naag aur munijan mohit ho rahe hain.

maina maatu kee have dulaaree. baam ang sohat chhavi nyaaree ||

arth- maata maina kee priy putree paarvateejee aapake baeen or sushobhit hain inakee shobha atyant niraalee aur nyaaree hai.

kar trishool sohat chhavi bhaaree. karat sada shatrun kshayakaaree ||

arth- aapake haath mein trishal apanee uttam chhavi se shobhaamaan ho raha hai jisase aap sadaiv shatruon ka sanhaar karate rahate hain.

nandi ganesh sohai tahan kaise. saagar madhy kamal hain jaise ||

arth- aapake paas aapaka vaahan nandee aur ganeshajee kuchh is prakaar shobhaayamaan ho rahe hain jaise samudr ke beech mein kamal khile hon.

kaartik shyaam aur ganaraoo. ya chhavi ko kahi jaat na kaoo ||

arth- kaartikeyajee aur unake gan vahaan par viraajamaan hain. is drshy kee shobha ka varnan koee nahin kar sakata.

devan jabaheen jaay pukaara. tab hee dukh prabhu aap nivaara ||

arth- he tripuraaree! devataon ne jab bhee sahaayata kee pukaar kee, he naath! aapane bina vilamb kie unake du:kh door kie.

kiya upadrav taarak bhaaree. devan sab mili tumahin juhaaree ||

arth- jab taadakaasur ne bahut atyaachaar karane aarambh kie to sabhee devataon ne aapase raksha karane kee praarthana kee.

turat shadaanan aap pathaayu. lavanimesh mahan maari giraayu ||

arth- aapane usee samay kaartikeyajee ko vahaan bheja aur unhone palak jhapakane kee deree mein us raakshas ko maar giraaya.

aap jalandhar asur sanhaara. suyash tumhaar vidit sansaara ||

arth- aapane jalandhar naamak bhayankar raakshas ka sanhaar kiya. usase aapaka jo yash phaila usase saara sansaar parichit hai.

tripuraasur san yuddh machaee. sabahin krpa kar leen bachaee ||

arth- tripur naamak raakshas se yuddh karake aapane sabhee devataon par krpa kee aur unako us dusht ke aatank se mukt kiya.

kiya tapahin bhaageerath bhaaree. purab pratigya taasu puraaree ||

arth- raaja bhageerath ke tap ke baad aapane apanee jataon mein vaas karatee ganga ko jaane kee aagya dee. bhageerath kee pratigya aapake kaaran hee pooree huee.

daanin mahan tum sam kou naaheen. sevak stuti karat sadaaheen ||

arth- aapakee baraabaree karane vaala koee daanee nahin hai. bhakt log sada hee aapaka gunagaan va yashogaan karate rahate hain.

ved maahi mahima tum gaee. akath anaadi bhed nahin paee ||

arth- vedon mein bhee aapakee mahima ka varnan hai. parantu anaadi hone ke kaaran aapaka rahasy koee bhee nahin pa saka.

prakatee udadhi manthan mein jvaala. jarat suraasur bhe vihaala ||

arth- samudr manthan se jo visharoopee jvaala nikalee usase devata aur raakshas donon jalane lage aur vihval ho gae.

keenhee daya tahan karee sahaee. neelakanth tab naam kahaee ||

arth- he neelakanth! tab aapane us jvaalaaroopee vish ka paan karake unakee sahaayata kee. tabhee se aapaka naam neelakanth pad gaya.

poojan raamachandr jab keenha. jeet ke lank vibheeshan deenha ||

arth- lanka par chadhaee karane se poorv shreeraam ne aapakee pooja ke baad hee vijay praapt kee aur vibheeshan ko lanka ka raaja bana diya.

sahas kamal mein ho rahe dhaaree. keenh pareeksha tabahin puraaree ||

arth- he mahaadev! jab shree raamachandrajee sahastr kamalon se aapakee pooja kar rahe the tab aapane phoolon mein rahakar unakee pareeksha lee.

ek kamal prabhu raakheu joee. kamal nayan poojan chahan soee ||

arth- aapane apanee maaya se ek kamal ka phool chhipa diya. tab raamachandrajee ne nayanaroopee kamal se pooja karane kee baat sochee.

kathin bhakti dekhee prabhu shankar. bhe prasann die ichchhit var ||

arth- is prakaar jab shivajee ne apane mein raamachandrajee kee yah drdh aastha dekhee tab aapane prasann hokar unhen manachaaha varadaan diya.

jay jay jay anant avinaashee. karat krpa sab ke ghatavaasee ||

arth- he shiv aap anant hain, anashvar hain. aapakee jay ho, jay ho, jay ho. aap sabake hrday mein rahakar un par krpa karate hain.

dusht sakal nit mohi sataavai. bhramat rahaun mohi chain na aavai ||

arth- dusht vichaar sadaiv mujhe peedit kar sataate rahate hain aur main bhramit rahata hoon jisake kaaran mujhe kaheen chain nahin milata hai.

traahi traahi main naath pukaaro. yehi avasar mohi aan ubaaro ||

arth- he naath! meree raksha karo, meree raksha karo- is prakaar main aapako pukaar raha hoon. aap aakar mujhe sankaton va kashto se ubaaren.

lai trishool shatrun ko maaro. sankat te mohi aan ubaaro ||

arth- he paapasanhaarak! apane trishool se mere shatruon ko nasht karo aur sankat se mera uddhaar kar mujhe bhavasaagar se paar lagao.

maat-pita bhraata sab hoee. sankat mein poochhat nahin koee ||

arth- maata-pita, bhaee-bandhu sab sukh ke saathee hain. dukhon mein koee saath nahin deta, sankat aane par koee nahin poochhata.

svaamee ek hai aas tumhaaree. aay harahu mam sankat bhaaree ||

arth- he svaamee! mujhe to keval aapase hee aasha hai, aap par hee vishvaas hai. aap aakar mera ghor sankat tatha kasht door karen.

dhan nirdhan ko det sada heen. jo koee jaanche so phal paaheen ||

arth- aap sada nirdhanon kee dhan dvaara sahaayata karate hain. aapase jis phal kee kaamana kee jaatee hai vahee phal praapt hota hai.

astuti kehi vidhi karain tumhaaree. kshamahu naath ab chook hamaree ||

arth- aapakee pooja-archana kaise kee jaatee hai, hamen to yah bhee maaloom nahin. atah hamaaree jo bhee bhool-chook huee ho use kshama kar den.

shankar ho sankat ke naashan. mangal kaaran vighn vinaashan ||

arth- aap hee kashton ko nasht karane vaale hain. sabhee shubh kaaryo ko karaane vaale hain tatha sab vidhn-baadhaon ko door karake kalyaan karate hain.

yogee yati muni dhyaan lagaavain. shaarad naarad sheesh navaavain ||

arth- yogee, yati aur muni sabhee aapaka dhyaan karate hain. naarad muni aur devee sarasvatee (shaarada) bhee aapako naman karate hain.

namo namo jay namah shivaay. sur brahmaadik paar na paay ||

arth- ‘om namah shivaay’ is panchaakshar mantr ka jaap karake bhee brahma aadi devata aapakee mahima ka paar nahin pa sake.

jo yah paath kare man laee. ta par hot hai shambhu sahaee ||

arth- jo koee bhee man tatha nishtha se shiv chaaleesa ka paath karata hai, shankar bhagavaan usakee sahaayata kar usakee sabhee ichchhaen poorn karate hain.

rniyaan jo koee ho adhikaaree. paath kare so paavan haaree ||

arth- he karunaanidhaan! karj ke bojh se daba hua vayakti aapake naam ka jaap kare to vah rn-mukt ho sukh-samrddhi praapt karata hai.

putr hon kar ichchha joee. nishchay shiv prasaad tehi hoee ||

arth- jo koee bhakt putr praapti kee kaamana se paath karata hai, to aapakee kripa se use putr-ratn kee praapti hotee hai.

pandit trayodashee ko laave. dhyaan poorvak hom karaave ||

arth- har shraddhaalu tatha bhakt o pratyek maah kee trayodashee tithi ko vidvaan pandit ko bulaakar pooja tatha havan karavaana chaahie.

trayodashee vrat karai hamesha. taake tan nahin rahai kalesha ||

arth- jo bhakt sadaiv trayodashee ka vrat karata hai, usake shareer mein koee rog nahin rahata aur kisee prakaar ka klesh bhee man mein nahin rahata.

dhoop deep naivedy chadhaave. shankar sammukh paath sunaave ||

arth- dhoop-deep aur naivedh se poojan karake shivajee kee moorti ya chitr ke sammukh baithakar shiv chaaleesa ka shraddhaapoorvak paath karana chaahie.

janm janm ke paap nasaave. ant dhaam shivapur mein paave ||

arth- isase janm-janmaantar ke paap nasht ho jaate hain aur ant mein manushy shivalok mein vaas karane lagata hai athaart mukt ho jaata hai.

kahain ayodhyaadaas aas tumhaaree. jaani sakal duhkh harahu hamaaree ||

arth- ayodhyaadaasajee kahate hain ki shankar bhagavaan, hamen aapase hee aasha hai. aap hamaaree manokaamanaen pooree karake hamaare dukhon ko door karen.

||doha ||

nitt nem kar praatah hee, paath karaun chaaleesa.

tum meree manokaamana, poorn karo jagadeesh ||

magasar chhathi hemant rtu, sanvat chausath jaan.

astuti chaaleesa shivahi, poorn keen kalyaan ||

arth- is shiv chaaleesa ka chaalees baar pratidin paath karane se bhagavaan manokaamana poorn karate hain. mrgashir maas ki chhthee tithi hemant rtu sanvat 64 mein yah chaaleesa roopee shiv stuti lok kalyaan ke lie poorn huee .Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स


Shiv Chalisa Benefits | Shiv Chalisa Lyrics

If the recitation of Shiv Chalisa (Shiv Chalisa) is done regularly 108 times daily, then the recitation of Shiv Chalisa (Shiv Chalisa) is so effective that new energy is transmitted in life. By reciting Shiv Chalisa 108 times daily, one gets freedom from physical and mental diseases, stress, and phantom obstacles and he never gets premature death. Everyone should recite Shiv Chalisa 108 times regularly.

To recite Shiv Chalisa (Shiv Chalisa), after retiring from bath, etc., before reciting Shiv Chalisa, worship the destroyer of obstacles, Ganpati, then meditate on Shiva, after that after bowing to Shiva, resolve to recite Shiv Chalisa and then to Hanuman ji. Worship by offering flowers, incense-lamp and naivedya. Now recite shiv chalisa and after reading shiv chalisa do aarti of hanuman ji.

Yes, both men and women can recite Shiv Chalisa with reverence.Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

To get the full results of Shiva Chalisa, the recitation of Shiv Chalisa should be started on Monday or on Trayodashi and Pradosh. After starting the recitation of Shiv Chalisa, it should be done for forty days, after that you have to recite twenty one till eleven Mondays. By reciting Shiva Chalisa in this method, Shiva is soon pleased.

The person who recites Shiv Chalisa regularly, is never harassed by ghosts, and the person who recites Shiv Chalisa becomes energetic and can never be defeated by the enemy and planets are placed on him. Does not have bad effects and that person never gets premature death.


Shiva Chalisa Lyrics in Gujarati | શ્રી શિવ ચાલીસા

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics
Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

|| દોહા ||

જય ગણેશ ગિરિજાસુવન મંગલ મૂલ સુજાન ।
કહત અયોધ્યાદાસ તુમ દેઉ અભય વરદાન ॥

॥ ચૌપાઈ॥

જય ગિરિજાપતિ દીનદયાલા ।
સદા કરત સન્તન પ્રતિપાલા ॥

ભાલ ચન્દ્રમા સોહત નીકે ।
કાનન કુણ્ડલ નાગ ફની કે ॥

અંગ ગૌર શિર ગંગ બહાયે ।
મુણ્ડમાલ તન ક્ષાર લગાયે ॥

વસ્ત્ર ખાલ બાઘમ્બર સોહે ।
છવિ કો દેખિ નાગ મન મોહે ॥

મૈના માતુ કિ હવે દુલારી ।
વામ અંગ સોહત છવિ ન્યારી ॥

કર ત્રિશૂલ સોહત છવિ ભારી ।
કરત સદા શત્રુન ક્ષયકારી ॥

નંદી ગણેશ સોહૈં તહં કૈસે ।
સાગર મધ્ય કમલ હૈં જૈસે ॥

કાર્તિક શ્યામ ઔર ગણરાઊ ।
યા છવિ કૌ કહિ જાત ન કાઊ ॥

દેવન જબહીં જાય પુકારા ।
તબહિં દુખ પ્રભુ આપ નિવારા ॥

કિયા ઉપદ્રવ તારક ભારી ।
દેવન સબ મિલિ તુમહિં જુહારી ॥

તુરત ષડાનન આપ પઠાયૌ ।
લવ નિમેષ મહં મારિ ગિરાયૌ ॥

આપ જલંધર અસુર સંહારા ।
સુયશ તુમ્હાર વિદિત સંસારા ॥

ત્રિપુરાસુર સન યુદ્ધ મચાઈ ।
તબહિં કૃપા કર લીન બચાઈ ॥

કિયા તપહિં ભાગીરથ ભારી ।
પુરબ પ્રતિજ્ઞા તાસુ પુરારી ॥

દાનિન મહં તુમ સમ કોઉ નાહીં ।
સેવક સ્તુતિ કરત સદાહીં ॥

વેદ માહિ મહિમા તુમ ગાઈ ।
અકથ અનાદિ ભેદ નહીં પાઈ ॥

પ્રકટે ઉદધિ મંથન મેં જ્વાલા ।
જરત સુરાસુર ભએ વિહાલા ॥

કીન્હ દયા તહં કરી સહાઈ ।
નીલકંઠ તબ નામ કહાઈ ॥

પૂજન રામચંદ્ર જબ કીન્હાં ।
જીત કે લંક વિભીષણ દીન્હા ॥

સહસ કમલ મેં હો રહે ધારી ।
કીન્હ પરીક્ષા તબહિં ત્રિપુરારી ॥

એક કમલ પ્રભુ રાખેઉ જોઈ ।
કમલ નયન પૂજન ચહં સોઈ ॥

કઠિન ભક્તિ દેખી પ્રભુ શંકર ।
ભયે પ્રસન્ન દિએ ઇચ્છિત વર ॥

જય જય જય અનંત અવિનાશી ।
કરત કૃપા સબકે ઘટ વાસી ॥

દુષ્ટ સકલ નિત મોહિ સતાવૈં ।
ભ્રમત રહૌં મોહે ચૈન ન આવૈં ॥

ત્રાહિ ત્રાહિ મૈં નાથ પુકારો ।
યહ અવસર મોહિ આન ઉબારો ॥

લે ત્રિશૂલ શત્રુન કો મારો ।
સંકટ સે મોહિં આન ઉબારો ॥

માત પિતા ભ્રાતા સબ કોઈ ।
સંકટ મેં પૂછત નહિં કોઈ ॥

સ્વામી એક હૈ આસ તુમ્હારી ।
આય હરહુ મમ સંકટ ભારી ॥

ધન નિર્ધન કો દેત સદા હી ।
જો કોઈ જાંચે સો ફલ પાહીં ॥

અસ્તુતિ કેહિ વિધિ કરોં તુમ્હારી ।
ક્ષમહુ નાથ અબ ચૂક હમારી ॥

શંકર હો સંકટ કે નાશન ।
મંગલ કારણ વિઘ્ન વિનાશન ॥

યોગી યતિ મુનિ ધ્યાન લગાવૈં ।
શારદ નારદ શીશ નવાવૈં ॥

નમો નમો જય નમઃ શિવાય ।
સુર બ્રહ્માદિક પાર ન પાય ॥

જો યહ પાઠ કરે મન લાઈ ।
તા પર હોત હૈં શમ્ભુ સહાઈ ॥

રનિયાં જો કોઈ હો અધિકારી ।
પાઠ કરે સો પાવન હારી ॥

પુત્ર હોન કી ઇચ્છા જોઈ ।
નિશ્ચય શિવ પ્રસાદ તેહિ હોઈ ॥

પણ્ડિત ત્રયોદશી કો લાવે ।
ધ્યાન પૂર્વક હોમ કરાવે ॥

ત્રયોદશી વ્રત કરૈ હમેશા ।
તન નહિં તાકે રહૈ કલેશા ॥

ધૂપ દીપ નૈવેદ્ય ચઢ़ાવે ।
શંકર સમ્મુખ પાઠ સુનાવે ॥

જન્મ જન્મ કે પાપ નસાવે ।
અન્ત ધામ શિવપુર મેં પાવે ॥

કહૈં અયોધ્યાદાસ આસ તુમ્હારી ।
જાનિ સકલ દુખ હરહુ હમારી ॥

|| દોહા ||

નિત નેમ ઉઠિ પ્રાતઃહી પાઠ કરો ચાલીસ ।
તુમ મેરી મનકામના પૂર્ણ કરો જગદીશ ॥Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स


Shiv Ji Chalisa Lyrics in Punjabi | Shiv Chalisa Lyrics

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics
Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स

ਸ਼੍ਰੀ ਗਣੇਸ਼ ਗਿਰਿਜਾ ਸੁਵਨ, ਮੰਗਲ ਮੂਲ ਸੁਜਾਨ।
ਕਹਤ ਅਯੋਧ੍ਯਾਦਾਸ ਤੁਮ, ਦੇਹੁ ਅਭਯ ਵਰਦਾਨ॥

ਜਯ ਗਿਰਿਜਾ ਪਤਿ ਦੀਨ ਦਯਾਲਾ। ਸਦਾ ਕਰਤ ਸਨ੍ਤਨ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲਾ॥
ਭਾਲ ਚਨ੍ਦ੍ਰਮਾ ਸੋਹਤ ਨੀਕੇ। ਕਾਨਨ ਕੁਣ੍ਡਲ ਨਾਗਫਨੀ ਕੇ॥
ਅੰਗ ਗੌਰ ਸ਼ਿਰ ਗੰਗ ਬਹਾਯੇ। ਮੁਣ੍ਡਮਾਲ ਤਨ ਛਾਰ ਲਗਾਯੇ॥
ਵਸ੍ਤ੍ਰ ਖਾਲ ਬਾਘਮ੍ਬਰ ਸੋਹੇ। ਛਵਿ ਕੋ ਦੇਖ ਨਾਗ ਮੁਨਿ ਮੋਹੇ॥1॥

ਮੈਨਾ ਮਾਤੁ ਕੀ ਹ੍ਵੈ ਦੁਲਾਰੀ। ਬਾਮ ਅੰਗ ਸੋਹਤ ਛਵਿ ਨ੍ਯਾਰੀ॥
ਕਰ ਤ੍ਰਿਸ਼ੂਲ ਸੋਹਤ ਛਵਿ ਭਾਰੀ। ਕਰਤ ਸਦਾ ਸ਼ਤ੍ਰੁਨ ਕ੍ਸ਼ਯਕਾਰੀ॥
ਨਨ੍ਦਿ ਗਣੇਸ਼ ਸੋਹੈ ਤਹੰ ਕੈਸੇ। ਸਾਗਰ ਮਧ੍ਯ ਕਮਲ ਹੈਂ ਜੈਸੇ॥
ਕਾਰ੍ਤਿਕ ਸ਼੍ਯਾਮ ਔਰ ਗਣਰਾਊ। ਯਾ ਛਵਿ ਕੋ ਕਹਿ ਜਾਤ ਨ ਕਾਊ॥2॥

ਦੇਵਨ ਜਬਹੀਂ ਜਾਯ ਪੁਕਾਰਾ। ਤਬ ਹੀ ਦੁਖ ਪ੍ਰਭੁ ਆਪ ਨਿਵਾਰਾ॥
ਕਿਯਾ ਉਪਦ੍ਰਵ ਤਾਰਕ ਭਾਰੀ। ਦੇਵਨ ਸਬ ਮਿਲਿ ਤੁਮਹਿੰ ਜੁਹਾਰੀ॥
ਤੁਰਤ ਸ਼ਡਾਨਨ ਆਪ ਪਠਾਯਉ। ਲਵਨਿਮੇਸ਼ ਮਹੰ ਮਾਰਿ ਗਿਰਾਯਉ॥
ਆਪ ਜਲੰਧਰ ਅਸੁਰ ਸੰਹਾਰਾ। ਸੁਯਸ਼ ਤੁਮ੍ਹਾਰ ਵਿਦਿਤ ਸੰਸਾਰਾ॥3॥

ਤ੍ਰਿਪੁਰਾਸੁਰ ਸਨ ਯੁਦ੍ਧ ਮਚਾਈ। ਸਬਹਿੰ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰ ਲੀਨ ਬਚਾਈ॥
ਕਿਯਾ ਤਪਹਿੰ ਭਾਗੀਰਥ ਭਾਰੀ। ਪੁਰਬ ਪ੍ਰਤਿਗਿਆ ਤਸੁ ਪੁਰਾਰੀ॥
ਦਾਨਿਨ ਮਹੰ ਤੁਮ ਸਮ ਕੋਉ ਨਾਹੀਂ। ਸੇਵਕ ਸ੍ਤੁਤਿ ਕਰਤ ਸਦਾਹੀਂ॥
ਵੇਦ ਨਾਮ ਮਹਿਮਾ ਤਵ ਗਾਈ। ਅਕਥ ਅਨਾਦਿ ਭੇਦ ਨਹਿੰ ਪਾਈ॥4॥

ਪ੍ਰਗਟ ਉਦਧਿ ਮੰਥਨ ਮੇਂ ਜ੍ਵਾਲਾ। ਜਰੇ ਸੁਰਾਸੁਰ ਭਯੇ ਵਿਹਾਲਾ॥
ਕੀਨ੍ਹ ਦਯਾ ਤਹੰ ਕਰੀ ਸਹਾਈ। ਨੀਲਕਣ੍ਠ ਤਬ ਨਾਮ ਕਹਾਈ॥
ਪੂਜਨ ਰਾਮਚੰਦ੍ਰ ਜਬ ਕੀਨ੍ਹਾ। ਜੀਤ ਕੇ ਲੰਕ ਵਿਭੀਸ਼ਣ ਦੀਨ੍ਹਾ॥
ਸਹਸ ਕਮਲ ਮੇਂ ਹੋ ਰਹੇ ਧਾਰੀ। ਕੀਨ੍ਹ ਪਰੀਕ੍ਸ਼ਾ ਤਬਹਿੰ ਪੁਰਾਰੀ॥5॥

ਏਕ ਕਮਲ ਪ੍ਰਭੁ ਰਾਖੇਉ ਜੋਈ। ਕਮਲ ਨਯਨ ਪੂਜਨ ਚਹੰ ਸੋਈ॥
ਕਠਿਨ ਭਕ੍ਤਿ ਦੇਖੀ ਪ੍ਰਭੁ ਸ਼ੰਕਰ। ਭਯੇ ਪ੍ਰਸਨ੍ਨ ਦਿਏ ਇਚ੍ਛਿਤ ਵਰ॥
ਜਯ ਜਯ ਜਯ ਅਨੰਤ ਅਵਿਨਾਸ਼ੀ। ਕਰਤ ਕ੍ਰਿਪਾ ਸਬ ਕੇ ਘਟਵਾਸੀ॥
ਦੁਸ਼੍ਟ ਸਕਲ ਨਿਤ ਮੋਹਿ ਸਤਾਵੈ । ਭ੍ਰਮਤ ਰਹੇ ਮੋਹਿ ਚੈਨ ਨ ਆਵੈ॥6॥

ਤ੍ਰਾਹਿ ਤ੍ਰਾਹਿ ਮੈਂ ਨਾਥ ਪੁਕਾਰੋ। ਯਹਿ ਅਵਸਰ ਮੋਹਿ ਆਨ ਉਬਾਰੋ॥
ਲੈ ਤ੍ਰਿਸ਼ੂਲ ਸ਼ਤ੍ਰੁਨ ਕੋ ਮਾਰੋ। ਸੰਕਟ ਸੇ ਮੋਹਿ ਆਨ ਉਬਾਰੋ॥
ਮਾਤੁ ਪਿਤਾ ਭ੍ਰਾਤਾ ਸਬ ਕੋਈ। ਸੰਕਟ ਮੇਂ ਪੂਛਤ ਨਹਿੰ ਕੋਈ॥
ਸ੍ਵਾਮੀ ਏਕ ਹੈ ਆਸ ਤੁਮ੍ਹਾਰੀ। ਆਯ ਹਰਹੁ ਅਬ ਸੰਕਟ ਭਾਰੀ॥7॥

ਧਨ ਨਿਰ੍ਧਨ ਕੋ ਦੇਤ ਸਦਾਹੀਂ। ਜੋ ਕੋਈ ਜਾੰਚੇ ਵੋ ਫਲ ਪਾਹੀਂ॥
ਅਸ੍ਤੁਤਿ ਕੇਹਿ ਵਿਧਿ ਕਰੌਂ ਤੁਮ੍ਹਾਰੀ। ਕ੍ਸ਼ਮਹੁ ਨਾਥ ਅਬ ਚੂਕ ਹਮਾਰੀ॥
ਸ਼ੰਕਰ ਹੋ ਸੰਕਟ ਕੇ ਨਾਸ਼ਨ। ਮੰਗਲ ਕਾਰਣ ਵਿਘ੍ਨ ਵਿਨਾਸ਼ਨ॥
ਯੋਗੀ ਯਤਿ ਮੁਨਿ ਧ੍ਯਾਨ ਲਗਾਵੈਂ। ਨਾਰਦ ਸ਼ਾਰਦ ਸ਼ੀਸ਼ ਨਵਾਵੈਂ॥8॥

ਨਮੋ ਨਮੋ ਜਯ ਨਮੋ ਸ਼ਿਵਾਯ। ਸੁਰ ਬ੍ਰਹ੍ਮਾਦਿਕ ਪਾਰ ਨ ਪਾਯ॥
ਜੋ ਯਹ ਪਾਠ ਕਰੇ ਮਨ ਲਾਈ। ਤਾ ਪਾਰ ਹੋਤ ਹੈ ਸ਼ਮ੍ਭੁ ਸਹਾਈ॥
ॠਨਿਯਾ ਜੋ ਕੋਈ ਹੋ ਅਧਿਕਾਰੀ। ਪਾਠ ਕਰੇ ਸੋ ਪਾਵਨ ਹਾਰੀ॥
ਪੁਤ੍ਰ ਹੀਨ ਕਰ ਇਚ੍ਛਾ ਕੋਈ। ਨਿਸ਼੍ਚਯ ਸ਼ਿਵ ਪ੍ਰਸਾਦ ਤੇਹਿ ਹੋਈ॥9॥

ਪਣ੍ਡਿਤ ਤ੍ਰਯੋਦਸ਼ੀ ਕੋ ਲਾਵੇ। ਧ੍ਯਾਨ ਪੂਰ੍ਵਕ ਹੋਮ ਕਰਾਵੇ ॥
ਤ੍ਰਯੋਦਸ਼ੀ ਬ੍ਰਤ ਕਰੇ ਹਮੇਸ਼ਾ। ਤਨ ਨਹੀਂ ਤਾਕੇ ਰਹੇ ਕਲੇਸ਼ਾ॥
ਧੂਪ ਦੀਪ ਨੈਵੇਦ੍ਯ ਚੜਾਵੇ। ਸ਼ੰਕਰ ਸਮ੍ਮੁਖ ਪਾਠ ਸੁਨਾਵੇ॥
ਜਨ੍ਮ ਜਨ੍ਮ ਕੇ ਪਾਪ ਨਸਾਵੇ। ਅਨ੍ਤਵਾਸ ਸ਼ਿਵਪੁਰ ਮੇਂ ਪਾਵੇ॥10॥

ਕਹੇ ਅਯੋਧ੍ਯਾ ਆਸ ਤੁਮ੍ਹਾਰੀ। ਜਾਨਿ ਸਕਲ ਦੁ:ਖ ਹਰਹੁ ਹਮਾਰੀ॥

॥ਦੋਹਾ॥

ਨਿਤ੍ਤ ਨੇਮ ਕਰ ਪ੍ਰਾਤ: ਹੀ, ਪਾਠ ਕਰੌਂ ਚਾਲੀਸਾ।
ਤੁਮ ਮੇਰੀ ਮਨੋਕਾਮਨਾ, ਪੂਰ੍ਣ ਕਰੋ ਜਗਦੀਸ਼॥
ਮਗਸਰ ਛਠਿ ਹੇਮਨ੍ਤ ॠਤੁ, ਸੰਵਤ ਚੌਸਠ ਜਾਨ।
ਅਸ੍ਤੁਤਿ ਚਾਲੀਸਾ ਸ਼ਿਵਹਿ, ਪੂਰ੍ਣ ਕੀਨ ਕਲ੍ਯਾਣ॥ Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स


 

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ 108 बार करने से क्या होता है?

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ यदि प्रतिदिन नियमित रूप से 108 बार किया जाय तो Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ इतना अधिक प्रभावशाली होता है कि जिससे जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है | शिव चालीसा को 108 बार नित्य पढने से शारीरिक व मानशिक रोग, तनाव एवं प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है तथा उसे कभी अकाल मृत्यु नही आती | सभी को शिव चालीसा का पाठ 108 बार नियमित रूप से करना चाहिए |

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ कैसे करें?

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ करने के लिए स्नान आदि से निवृत होकर शिव चालीसा पाठ से पहले विघ्न विनाशक गणपति जी की आराधना करें फिर शिव जी का ध्यान करें उसके बाद शिवजी को प्रणाम करके शिव चालीसा पाठ का संकल्प करें फिर हनुमान जी को फूल, धूप-दीप और नैवेद्य चढ़ाकर पूजन करें | अब शिव चालीसा का पाठ करें और shiv चालीसा पढने के बाद हनुमान जी की आरती करें |

क्या महिलाएं भी शिव चालीसा पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, शिव चालीसा का पाठ महिलाएं व पुरुष सभी श्रद्धा पूर्वक कर सकते हैं |

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ कब तक करें?

हshiv Chalisa (शिव चालीसा) का पूर्णतया फल प्राप्त करने के लिए शिव चालीसा के पाठ की शुरुआत सोमवार या त्रयोदशी व प्रदोष से करना चाहिए | शिव चालीसा का पाठ शुरू करनें के बाद उसे चालीस दिनों तक करना चाहिए उसके बाद आपको ग्यारह सोमवार तक इक्कीस पाठ करनें होते हैं | इस विधि से शिव चालीसा का पाठ करनें से शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं |

Shiv Chalisa (शिव चालीसा) पढने से क्या लाभ होता है?

जो व्यक्ति प्रतिदिन नियमित रूप से Shiv Chalisa (शिव चालीसा) का पाठ करता है उसे भूत प्रेत की बाधा कभी नहीं सताती है और शिव चालीसा का पाठ करने वाला व्यक्ति ओजवान हो जाता है तथा उसे शत्रु कभी पराजित नहीं कर सकता है एवं उस पर ग्रहनक्षत्रो के बुरे प्रभाव भी नहीं पड़ते है एवं वह व्यक्ति अकाल मृत्यु को कभी नहीं प्राप्त होता |

Shiv Chalisa Lyrics – शिव चालीसा लिरिक्स | No.1 Best Shri Shiv Chalisa Lyrics

Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स – जय गिरिजा पति दीन दयाला


आशा करता हूँ की यह  Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्सजय गिरिजा पति दीन दयाला जरुर पसंद आया होगा अगर आपको यह Shri Shiv Chalisa Lyrics, शिव चालीसा लिरिक्स – जय गिरिजा पति दीन दयाला पसंद आया हो तो – “कमेन्ट जरूर करें |”

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धन्यवाद्
पवन शास्त्री ( सुर सरिता टेक्नो )

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