Sai Chalisa Lyrics, साईं चालीसा लिरिक्स – Lyrics And Video

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इस Post में आपको साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics का हिंदी एवं English Lyrics भी दिया जा रहा है और उम्मीद करता हूँ कि आपको यह – साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics जरूर heylpful होगा |

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics In Hindi

Sai Chalisa Lyrics, साईं चालीसा लिरिक्स – Lyrics And Video

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

यहाँ – साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics दिया गया है-

पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नमाऊं मैं |
कैसे शिरडी साईं आए, सारा हाल सुनाऊं मैं ||

कौन है माता, पिता कौन है, ये न किसी ने भी जाना |
कहां जन्म साईं ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना ||

कोई कहे अयोध्या के, ये रामचंद्र भगवान हैं |
कोई कहता साईं बाबा, पवन पुत्र हनुमान हैं ||

कोई कहता मंगल मूर्ति, श्री गजानंद हैं साईं |
कोई कहता गोकुल मोहन, देवकी नंदन हैं साईं ||

शंकर समझे भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते |
कोई कह अवतार दत्त का, पूजा साईं की करते ||

कुछ भी मानो उनको तुम, पर साईं हैं सच्चे भगवान |
बड़े दयालु दीनबंधु, कितनों को दिया जीवन दान ||

कई वर्ष पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊंगा मैं बात |
किसी भाग्यशाली की, शिरडी में आई थी बारात ||

आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुंदर |
आया, आकर वहीं बस गया, पावन शिरडी किया नगर ||

कई दिनों तक भटकता, भिक्षा मांग उसने दर-दर |
और दिखाई ऐसी लीला, जग में जो हो गई अमर ||

जैसे-जैसे उमर बढ़ी, बढ़ती ही वैसे गई शान |
घर-घर होने लगा नगर में, साईं बाबा का गुणगान ||

दिग दिगंत में लगा गूंजने, फिर तो साईं जी का नाम ||
दीन-दुखी की रक्षा करना, यही रहा बाबा का काम || ||

बाबा के चरणों में जाकर, जो कहता मैं हूं निर्धन ||
दया उसी पर होती उनकी, खुल जाते दुख के बंधन || ||

कभी किसी ने मांगी भिक्षा, दो बाबा मुझको संतान ||
एवमस्तु तब कहकर साईं, देते थे उसको वरदान || ||

स्वयं दुखी बाबा हो जाते, दीन-दुखीजन का लख हाल ||
अंत:करण श्री साईं का, सागर जैसा रहा विशाल || ||

भक्त एक मद्रासी आया, घर का बहुत बड़ा धनवान ||
माल खजाना बेहद उसका, केवल नहीं रही संतान || ||

लगा मनाने साईंनाथ को, बाबा मुझ पर दया करो ||
झंझा से झंकृत नैया को, तुम्हीं मेरी पार करो || ||

कुलदीपक के बिना अंधेरा, छाया हुआ घर में मेरे ||
इसलिए आया हूं बाबा, होकर शरणागत तेरे || ||

कुलदीपक के अभाव में, व्यर्थ है दौलत की माया ||
आज भिखारी बनकर बाबा, शरण तुम्हारी मैं आया || ||

दे-दो मुझको पुत्र-दान, मैं ऋणी रहूंगा जीवन भर ||
और किसी की आशा न मुझको, सिर्फ भरोसा है तुम पर || ||

अनुनय-विनय बहुत की उसने, चरणों में धर के शीश ||
तब प्रसन्न होकर बाबा ने, दिया भक्त को यह आशीष || ||

अल्ला भला करेगा तेरा’ पुत्र जन्म हो तेरे घर ||
कृपा रहेगी तुझ पर उसकी, और तेरे उस बालक पर || ||

अब तक नहीं किसी ने पाया, साईं की कृपा का पार ||
पुत्र रत्न दे मद्रासी को, धन्य किया उसका संसार || ||

तन-मन से जो भजे उसी का, जग में होता है उद्धार ||
सांच को आंच नहीं हैं कोई, सदा झूठ की होती हार || ||

मैं हूं सदा सहारे उसके, सदा रहूंगा उसका दास ||
साईं जैसा प्रभु मिला है, इतनी ही कम है क्या आस || ||

मेरा भी दिन था एक ऐसा, मिलती नहीं मुझे रोटी ||
तन पर कपड़ा दूर रहा था, शेष रही नन्हीं सी लंगोटी || ||

सरिता सन्मुख होने पर भी, मैं प्यासा का प्यासा था ||
दुर्दिन मेरा मेरे ऊपर, दावाग्नी बरसाता था || ||

धरती के अतिरिक्त जगत में, मेरा कुछ अवलंब न था ||
बना भिखारी मैं दुनिया में, दर-दर ठोकर खाता था || ||

ऐसे में एक मित्र मिला जो, परम भक्त साईं का था ||
जंजालों से मुक्त मगर, जगत में वह भी मुझसा था || ||

बाबा के दर्शन की खातिर, मिल दोनों ने किया विचार ||
साईं जैसे दया मूर्ति के, दर्शन को हो गए तैयार || ||

पावन शिरडी नगर में जाकर, देख मतवाली मूरति ||
धन्य जन्म हो गया कि हमने, जब देखी साईं की सूरति || ||

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

जब से किए हैं दर्शन हमने, दुख सारा काफूर हो गया ||
संकट सारे मिटै और, विपदाओं का अंत हो गया || ||

मान और सम्मान मिला, भिक्षा में हमको बाबा से ||
प्रतिबिंबित हो उठे जगत में, हम साईं की आभा से || ||

बाबा ने सन्मान दिया है, मान दिया इस जीवन में ||
इसका ही संबल ले मैं, हंसता जाऊंगा जीवन में || ||

साईं की लीला का मेरे, मन पर ऐसा असर हुआ ||
लगता जगती के कण-कण में, जैसे हो वह भरा हुआ || ||

‘काशीराम’ बाबा का भक्त, शिरडी में रहता था ||
मैं साईं का साईं मेरा, वह दुनिया से कहता था || ||

सीकर स्वयं वस्त्र बेचता, ग्राम-नगर बाजारों में ||
झंकृत उसकी हृदय तंत्री थी, साईं की झंकारों में || ||

स्तब्ध निशा थी, थे सोए, रजनी आंचल में चांद सितारे ||
नहीं सूझता रहा हाथ को हाथ तिमिर के मारे || ||

वस्त्र बेचकर लौट रहा था, हाय! हाट से काशी ||
विचित्र बड़ा संयोग कि उस दिन, आता था एकाकी || ||

घेर राह में खड़े हो गए, उसे कुटिल अन्यायी ||
मारो काटो लूटो इसकी ही, ध्वनि पड़ी सुनाई || ||

लूट पीटकर उसे वहां से कुटिल गए चम्पत हो ||
आघातों में मर्माहत हो, उसने दी संज्ञा खो || ||

बहुत देर तक पड़ा रह वह, वहीं उसी हालत में ||
जाने कब कुछ होश हो उठा, वहीं उसकी पलक में || ||

अनजाने ही उसके मुंह से, निकल पड़ा था साईं ||
जिसकी प्रतिध्वनि शिरडी में, बाबा को पड़ी सुनाई || ||

क्षुब्ध हो उठा मानस उनका, बाबा गए विकल हो ||
लगता जैसे घटना सारी, घटी उन्हीं के सन्मुख हो || ||

उन्मादी से इधर-उधर तब, बाबा लेगे भटकने ||
सन्मुख चीजें जो भी आई, उनको लगने पटकने || ||

और धधकते अंगारों में, बाबा ने अपना कर डाला ||
हुए सशंकित सभी वहां, लख तांडवनृत्य निराला || ||

समझ गए सब लोग, कि कोई भक्त पड़ा संकट में ||
क्षुभित खड़े थे सभी वहां, पर पड़े हुए विस्मय में || ||

उसे बचाने की ही खातिर, बाबा आज विकल है ||
उसकी ही पीड़ा से पीड़‍ित, उनकी अंत:स्थल है || ||

इतने में ही विविध ने अपनी, विचित्रता दिखलाई ||
लख कर जिसको जनता की, श्रद्धा सरिता लहराई || ||

लेकर संज्ञाहीन भक्त को, गाड़ी एक वहां आई ||
सन्मुख अपने देख भक्त को, साईं की आंखें भर आई || ||

शांत, धीर, गंभीर, सिंधु-सा, बाबा का अंत:स्थल ||
आज न जाने क्यों रह-रहकर, हो जाता था चंचल || ||

आज दया की मूर्ति स्वयं था, बना हुआ उपचारी ||
और भक्त के लिए आज था, देव बना प्रतिहारी || ||

आज भक्त की विषम परीक्षा में, सफल हुआ था काशी ||
उसके ही दर्शन की खातिर थे, उमड़े नगर-निवासी ||

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

जब भी और जहां भी कोई, भक्त पड़े संकट में ||
उसकी रक्षा करने बाबा, आते हैं पलभर में || ||

युग-युग का है सत्य यह, नहीं कोई नई कहानी ||
आपद्‍ग्रस्त भक्त जब होता, जाते खुद अंर्तयामी || ||

भेदभाव से परे पुजारी, मानवता के थे साईं ||
जितने प्यारे हिन्दू-मुस्लिम, उतने ही थे सिक्ख ईसाई || ||

भेद-भाव मंदिर-मिस्जद का, तोड़-फोड़ बाबा ने डाला ||
राह रहीम सभी उनके थे, कृष्ण करीम अल्लाताला || ||

श्री साईं चालीसा लिरिक्स, Shri Sai Chalisa Lyrics

घंटे की प्रतिध्वनि से गूंजा, मस्जिद का कोना-कोना ||
मिले परस्पर हिन्दू-मुस्लिम, प्यार बढ़ा दिन-दिन दूना || ||

चमत्कार था कितना सुंदर, परिचय इस काया ने दी ||
और नीम कडुवाहट में भी, मिठास बाबा ने भर दी || ||

सब को स्नेह दिया साईं ने, सबको संतुल प्यार किया ||
जो कुछ जिसने भी चाहा, बाबा ने उसको वही दिया || ||

ऐसे स्नेहशील भाजन का, नाम सदा जो जपा करे ||
पर्वत जैसा दुख न क्यों हो, पलभर में वह दूर टरे || ||

साईं जैसा दाता हमने, अरे नहीं देखा कोई ||
जिसके केवल दर्शन से ही, सारी विपदा दूर गई || ||

तन में साईं, मन में साईं, साईं-साईं भजा करो ||
अपने तन की सुधि-बुधि खोकर, सुधि उसकी तुम किया करो || ||

जब तू अपनी सुधि तज, बाबा की सुधि किया करेगा ||
और रात-दिन बाबा-बाबा, ही तू रटा करेगा || ||

तो बाबा को अरे! विवश हो, सुधि तेरी लेनी ही होगी ||
तेरी हर इच्छा बाबा को पूरी ही करनी होगी || ||

जंगल, जंगल भटक न पागल, और ढूंढ़ने बाबा को ||
एक जगह केवल शिरडी में, तू पाएगा बाबा को || ||

धन्य जगत में प्राणी है वह, जिसने बाबा को पाया ||
दुख में, सुख में प्रहर आठ हो, साईं का ही गुण गाया || ||

गिरे संकटों के पर्वत, चाहे बिजली ही टूट पड़े ||
साईं का ले नाम सदा तुम, सन्मुख सबके रहो अड़े || ||

इस बूढ़े की सुन करामत, तुम हो जाओगे हैरान ||
दंग रह गए सुनकर जिसको, जाने कितने चतुर सुजान || ||

एक बार शिरडी में साधु, ढ़ोंगी था कोई आया ||
भोली-भाली नगर-निवासी, जनता को था भरमाया || ||

जड़ी-बूटियां उन्हें दिखाकर, करने लगा वह भाषण ||
कहने लगा सुनो श्रोतागण, घर मेरा है वृन्दावन || ||

औषधि मेरे पास एक है, और अजब इसमें शक्ति ||
इसके सेवन करने से ही, हो जाती दुख से मुक्ति || ||

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

अगर मुक्त होना चाहो, तुम संकट से बीमारी से ||
तो है मेरा नम्र निवेदन, हर नर से, हर नारी से || ||

लो खरीद तुम इसको, इसकी सेवन विधियां हैं न्यारी ||
यद्यपि तुच्छ वस्तु है यह, गुण उसके हैं अति भारी || ||

जो है संतति हीन यहां यदि, मेरी औषधि को खाए ||
पुत्र-रत्न हो प्राप्त, अरे वह मुंह मांगा फल पाए || ||

औषधि मेरी जो न खरीदे, जीवन भर पछताएगा ||
मुझ जैसा प्राणी शायद ही, अरे यहां आ पाएगा || ||

दुनिया दो दिनों का मेला है, मौज शौक तुम भी कर लो ||
अगर इससे मिलता है, सब कुछ, तुम भी इसको ले लो || ||

हैरानी बढ़ती जनता की, देख इसकी कारस्तानी ||
प्रमुदित वह भी मन ही मन था, देख लोगों की नादानी || ||

खबर सुनाने बाबा को यह, गया दौड़कर सेवक एक ||
सुनकर भृकुटी तनी और, विस्मरण हो गया सभी विवेक || ||

हुक्म दिया सेवक को, सत्वर पकड़ दुष्ट को लाओ ||
या शिरडी की सीमा से, कपटी को दूर भगाओ || ||

मेरे रहते भोली-भाली, शिरडी की जनता को ||
कौन नीच ऐसा जो, साहस करता है छलने को || ||

पलभर में ऐसे ढोंगी, कपटी नीच लुटेरे को ||
महानाश के महागर्त में पहुंचा, दूं जीवन भर को || ||

तनिक मिला आभास मदारी, क्रूर, कुटिल अन्यायी को ||
काल नाचता है अब सिर पर, गुस्सा आया साईं को || ||

पलभर में सब खेल बंद कर, भागा सिर पर रखकर पैर ||
सोच रहा था मन ही मन, भगवान नहीं है अब खैर || ||

सच है साईं जैसा दानी, मिल न सकेगा जग में ||
अंश ईश का साईं बाबा, उन्हें न कुछ भी मुश्किल जग में || ||

स्नेह, शील, सौजन्य आदि का, आभूषण धारण कर ||
बढ़ता इस दुनिया में जो भी, मानव सेवा के पथ पर || ||

वही जीत लेता है जगत के, जन जन का अंत:स्थल ||
उसकी एक उदासी ही, जग को कर देती है विहल || ||

जब-जब जग में भार पाप का, बढ़-बढ़ ही जाता है ||
उसे मिटाने की ही खातिर, अवतारी ही आता है || ||

पाप और अन्याय सभी कुछ, इस जगती का हर के ||
दूर भगा देता दुनिया के, दानव को क्षण भर के || ||

ऐसे ही अवतारी साईं, मृत्युलोक में आकर ||
समता का यह पाठ पढ़ाया, सबको अपना आप मिटाकर || ||

नाम द्वारका मस्जिद का, रखा शिरडी में साईं ने ||
दाप, ताप, संताप मिटाया, जो कुछ आया साईं ने || ||

सदा याद में मस्त राम की, बैठे रहते थे साईं ||
पहर आठ ही राम नाम को, भजते रहते थे साईं || ||

सूखी-रूखी ताजी बासी, चाहे या होवे पकवान ||
सौदा प्यार के भूखे साईं की, खातिर थे सभी समान || ||

स्नेह और श्रद्धा से अपनी, जन जो कुछ दे जाते थे ||
बड़े चाव से उस भोजन को, बाबा पावन करते थे || ||

कभी-कभी मन बहलाने को, बाबा बाग में जाते थे ||
प्रमुदित मन में निरख प्रकृति, आनंदित वे हो जाते थे || ||

रंग-बिरंगे पुष्प बाग के, मंद-मंद हिल-डुल करके ||
बीहड़ वीराने मन में भी स्नेह सलिल भर जाते थे || ||

ऐसी सुमधुर बेला में भी, दुख आपात, विपदा के मारे ||
अपने मन की व्यथा सुनाने, जन रहते बाबा को घेरे || ||

सुनकर जिनकी करूणकथा को, नयन कमल भर आते थे ||
दे विभूति हर व्यथा, शांति, उनके उर में भर देते थे || ||

जाने क्या अद्भुत शक्ति, उस विभूति में होती थी ||
जो धारण करते मस्तक पर, दुख सारा हर लेती थी || ||

धन्य मनुज वे साक्षात् दर्शन, जो बाबा साईं के पाए ||
धन्य कमल कर उनके जिनसे, चरण-कमल वे परसाए || ||

काश निर्भय तुमको भी, साक्षात् साईं मिल जाता ||
वर्षों से उजड़ा चमन अपना, फिर से आज खिल जाता || ||

गर पकड़ता मैं चरण श्री के, नहीं छोड़ता उम्रभर || ||
मना लेता मैं जरूर उनको, गर रूठते साईं मुझ पर || ||

|| || इति श्री साईं चालीसा समाप्त, Sai Chalisa Lyrics || ||

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साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics Video

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics


Sai Chalisa Lyrics In English

Here Sai Chalisa Lyrics Given –

pahale saeen ke charanon mein, apana sheesh namaoon main |
kaise shiradee saeen aae, saara haal sunaoon main ||

kaun hai maata, pita kaun hai, ye na kisee ne bhee jaana |
kahaan janm saeen ne dhaara, prashn pahelee raha bana ||

koee kahe ayodhya ke, ye raamachandr bhagavaan hain |
koee kahata saeen baaba, pavan putr hanumaan hain ||

koee kahata mangal moorti, shree gajaanand hain saeen |
koee kahata gokul mohan, devakee nandan hain saeen ||

shankar samajhe bhakt kaee to, baaba ko bhajate rahate |
koee kah avataar datt ka, pooja saeen kee karate ||

kuchh bhee maano unako tum, par saeen hain sachche bhagavaan |
bade dayaalu deenabandhu, kitanon ko diya jeevan daan ||

kaee varsh pahale kee ghatana, tumhen sunaoonga main baat |
kisee bhaagyashaalee kee, shiradee mein aaee thee baaraat ||

aaya saath usee ke tha, baalak ek bahut sundar |
aaya, aakar vaheen bas gaya, paavan shiradee kiya nagar ||

kaee dinon tak bhatakata, bhiksha maang usane dar-dar |
aur dikhaee aisee leela, jag mein jo ho gaee amar ||

jaise-jaise umar badhee, badhatee hee vaise gaee shaan |
ghar-ghar hone laga nagar mein, saeen baaba ka gunagaan ||

dig digant mein laga goonjane, phir to saeen jee ka naam ||
deen-dukhee kee raksha karana, yahee raha baaba ka kaam || ||

baaba ke charanon mein jaakar, jo kahata main hoon nirdhan ||
daya usee par hotee unakee, khul jaate dukh ke bandhan || ||

kabhee kisee ne maangee bhiksha, do baaba mujhako santaan ||
evamastu tab kahakar saeen, dete the usako varadaan || ||

svayan dukhee baaba ho jaate, deen-dukheejan ka lakh haal ||
ant:karan shree saeen ka, saagar jaisa raha vishaal || ||

bhakt ek madraasee aaya, ghar ka bahut bada dhanavaan ||
maal khajaana behad usaka, keval nahin rahee santaan || ||

laga manaane saeennaath ko, baaba mujh par daya karo ||
jhanjha se jhankrt naiya ko, tumheen meree paar karo || ||

kuladeepak ke bina andhera, chhaaya hua ghar mein mere ||
isalie aaya hoon baaba, hokar sharanaagat tere || ||

श्री साईं चालीसा लिरिक्स, Shri Sai Chalisa Lyrics

kuladeepak ke abhaav mein, vyarth hai daulat kee maaya ||
aaj bhikhaaree banakar baaba, sharan tumhaaree main aaya || ||

de-do mujhako putr-daan, main rnee rahoonga jeevan bhar ||
aur kisee kee aasha na mujhako, sirph bharosa hai tum par || ||

anunay-vinay bahut kee usane, charanon mein dhar ke sheesh ||
tab prasann hokar baaba ne, diya bhakt ko yah aasheesh || ||

alla bhala karega tera putr janm ho tere ghar ||
krpa rahegee tujh par usakee, aur tere us baalak par || ||

ab tak nahin kisee ne paaya, saeen kee krpa ka paar ||
putr ratn de madraasee ko, dhany kiya usaka sansaar || ||

tan-man se jo bhaje usee ka, jag mein hota hai uddhaar ||
saanch ko aanch nahin hain koee, sada jhooth kee hotee haar || ||

main hoon sada sahaare usake, sada rahoonga usaka daas ||
saeen jaisa prabhu mila hai, itanee hee kam hai kya aas || ||

mera bhee din tha ek aisa, milatee nahin mujhe rotee ||
tan par kapada door raha tha, shesh rahee nanheen see langotee || ||

sarita sanmukh hone par bhee, main pyaasa ka pyaasa tha ||
durdin mera mere oopar, daavaagnee barasaata tha || ||

dharatee ke atirikt jagat mein, mera kuchh avalamb na tha ||
bana bhikhaaree main duniya mein, dar-dar thokar khaata tha || ||

aise mein ek mitr mila jo, param bhakt saeen ka tha ||
janjaalon se mukt magar, jagat mein vah bhee mujhasa tha || ||

baaba ke darshan kee khaatir, mil donon ne kiya vichaar ||
saeen jaise daya moorti ke, darshan ko ho gae taiyaar || ||

paavan shiradee nagar mein jaakar, dekh matavaalee moorati ||
dhany janm ho gaya ki hamane, jab dekhee saeen kee soorati || ||

jab se kie hain darshan hamane, dukh saara kaaphoor ho gaya ||
sankat saare mitai aur, vipadaon ka ant ho gaya || ||

maan aur sammaan mila, bhiksha mein hamako baaba se ||
pratibimbit ho uthe jagat mein, ham saeen kee aabha se || ||

baaba ne sanmaan diya hai, maan diya is jeevan mein ||
isaka hee sambal le main, hansata jaoonga jeevan mein || ||

saeen kee leela ka mere, man par aisa asar hua ||
lagata jagatee ke kan-kan mein, jaise ho vah bhara hua || ||

kaasheeraam baaba ka bhakt, shiradee mein rahata tha ||
main saeen ka saeen mera, vah duniya se kahata tha || ||

seekar svayan vastr bechata, graam-nagar baajaaron mein ||
jhankrt usakee hrday tantree thee, saeen kee jhankaaron mein || ||

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

stabdh nisha thee, the soe, rajanee aanchal mein chaand sitaare ||
nahin soojhata raha haath ko haath timir ke maare || ||

vastr bechakar laut raha tha, haay! haat se kaashee ||
vichitr bada sanyog ki us din, aata tha ekaakee || ||

gher raah mein khade ho gae, use kutil anyaayee ||
maaro kaato looto isakee hee, dhvani padee sunaee || ||

loot peetakar use vahaan se kutil gae champat ho ||
aaghaaton mein marmaahat ho, usane dee sangya kho || ||

bahut der tak pada rah vah, vaheen usee haalat mein ||
jaane kab kuchh hosh ho utha, vaheen usakee palak mein || ||

anajaane hee usake munh se, nikal pada tha saeen ||
jisakee pratidhvani shiradee mein, baaba ko padee sunaee || ||

kshubdh ho utha maanas unaka, baaba gae vikal ho ||
lagata jaise ghatana saaree, ghatee unheen ke sanmukh ho || ||

unmaadee se idhar-udhar tab, baaba lege bhatakane ||
sanmukh cheejen jo bhee aaee, unako lagane patakane || ||

aur dhadhakate angaaron mein, baaba ne apana kar daala ||
hue sashankit sabhee vahaan, lakh taandavanrty niraala || ||

samajh gae sab log, ki koee bhakt pada sankat mein ||
kshubhit khade the sabhee vahaan, par pade hue vismay mein || ||

श्री साईं चालीसा लिरिक्स, Shri Sai Chalisa Lyrics

use bachaane kee hee khaatir, baaba aaj vikal hai ||
usakee hee peeda se peed‍it, unakee ant:sthal hai || ||

itane mein hee vividh ne apanee, vichitrata dikhalaee ||
lakh kar jisako janata kee, shraddha sarita laharaee || ||

lekar sangyaaheen bhakt ko, gaadee ek vahaan aaee ||
sanmukh apane dekh bhakt ko, saeen kee aankhen bhar aaee || ||

shaant, dheer, gambheer, sindhu-sa, baaba ka ant:sthal ||
aaj na jaane kyon rah-rahakar, ho jaata tha chanchal || ||

aaj daya kee moorti svayan tha, bana hua upachaaree ||
aur bhakt ke lie aaj tha, dev bana pratihaaree || ||

aaj bhakt kee visham pareeksha mein, saphal hua tha kaashee ||
usake hee darshan kee khaatir the, umade nagar-nivaas

jab bhee aur jahaan bhee koee, bhakt pade sankat mein ||
usakee raksha karane baaba, aate hain palabhar mein || ||

yug-yug ka hai saty yah, nahin koee naee kahaanee ||
aapad‍grast bhakt jab hota, jaate khud anrtayaamee || ||

bhedabhaav se pare pujaaree, maanavata ke the saeen ||
jitane pyaare hindoo-muslim, utane hee the sikkh eesaee || ||

bhed-bhaav mandir-misjad ka, tod-phod baaba ne daala ||
raah raheem sabhee unake the, krshn kareem allaataala || ||

ghante kee pratidhvani se goonja, masjid ka kona-kona ||
mile paraspar hindoo-muslim, pyaar badha din-din doona || ||

chamatkaar tha kitana sundar, parichay is kaaya ne dee ||
aur neem kaduvaahat mein bhee, mithaas baaba ne bhar dee || ||

sab ko sneh diya saeen ne, sabako santul pyaar kiya ||
jo kuchh jisane bhee chaaha, baaba ne usako vahee diya || ||

aise snehasheel bhaajan ka, naam sada jo japa kare ||
parvat jaisa dukh na kyon ho, palabhar mein vah door tare || ||

saeen jaisa daata hamane, are nahin dekha koee ||
jisake keval darshan se hee, saaree vipada door gaee || ||

tan mein saeen, man mein saeen, saeen-saeen bhaja karo ||
apane tan kee sudhi-budhi khokar, sudhi usakee tum kiya karo || ||

jab too apanee sudhi taj, baaba kee sudhi kiya karega ||
aur raat-din baaba-baaba, hee too rata karega || ||

to baaba ko are! vivash ho, sudhi teree lenee hee hogee ||
teree har ichchha baaba ko pooree hee karanee hogee || ||

साईं चालीसा लिरिक्स, Sai Chalisa Lyrics

jangal, jangal bhatak na paagal, aur dhoondhane baaba ko ||
ek jagah keval shiradee mein, too paega baaba ko || ||

dhany jagat mein praanee hai vah, jisane baaba ko paaya ||
dukh mein, sukh mein prahar aath ho, saeen ka hee gun gaaya || ||

gire sankaton ke parvat, chaahe bijalee hee toot pade ||
saeen ka le naam sada tum, sanmukh sabake raho ade || ||

is boodhe kee sun karaamat, tum ho jaoge hairaan ||
dang rah gae sunakar jisako, jaane kitane chatur sujaan || ||

ek baar shiradee mein saadhu, dhongee tha koee aaya ||
bholee-bhaalee nagar-nivaasee, janata ko tha bharamaaya || ||

jadee-bootiyaan unhen dikhaakar, karane laga vah bhaashan ||
kahane laga suno shrotaagan, ghar mera hai vrndaavan || ||

aushadhi mere paas ek hai, aur ajab isamen shakti ||
isake sevan karane se hee, ho jaatee dukh se mukti || ||

agar mukt hona chaaho, tum sankat se beemaaree se ||
to hai mera namr nivedan, har nar se, har naaree se || ||

lo khareed tum isako, isakee sevan vidhiyaan hain nyaaree ||
yadyapi tuchchh vastu hai yah, gun usake hain ati bhaaree || ||

jo hai santati heen yahaan yadi, meree aushadhi ko khae ||
putr-ratn ho praapt, are vah munh maanga phal pae || ||

aushadhi meree jo na khareede, jeevan bhar pachhataega ||
mujh jaisa praanee shaayad hee, are yahaan aa paega || ||

duniya do dinon ka mela hai, mauj shauk tum bhee kar lo ||
agar isase milata hai, sab kuchh, tum bhee isako le lo || ||

hairaanee badhatee janata kee, dekh isakee kaarastaanee ||
pramudit vah bhee man hee man tha, dekh logon kee naadaanee || ||

khabar sunaane baaba ko yah, gaya daudakar sevak ek ||
sunakar bhrkutee tanee aur, vismaran ho gaya sabhee vivek || ||

श्री साईं चालीसा लिरिक्स, Shri Sai Chalisa Lyrics

hukm diya sevak ko, satvar pakad dusht ko lao ||
ya shiradee kee seema se, kapatee ko door bhagao || ||

mere rahate bholee-bhaalee, shiradee kee janata ko ||
kaun neech aisa jo, saahas karata hai chhalane ko || ||

palabhar mein aise dhongee, kapatee neech lutere ko ||
mahaanaash ke mahaagart mein pahuncha, doon jeevan bhar ko || ||

tanik mila aabhaas madaaree, kroor, kutil anyaayee ko ||
kaal naachata hai ab sir par, gussa aaya saeen ko || ||

palabhar mein sab khel band kar, bhaaga sir par rakhakar pair ||
soch raha tha man hee man, bhagavaan nahin hai ab khair || ||

sach hai saeen jaisa daanee, mil na sakega jag mein ||
ansh eesh ka saeen baaba, unhen na kuchh bhee mushkil jag mein || ||

sneh, sheel, saujany aadi ka, aabhooshan dhaaran kar ||
badhata is duniya mein jo bhee, maanav seva ke path par || ||

vahee jeet leta hai jagat ke, jan jan ka ant:sthal ||
usakee ek udaasee hee, jag ko kar detee hai vihal || ||

jab-jab jag mein bhaar paap ka, badh-badh hee jaata hai ||
use mitaane kee hee khaatir, avataaree hee aata hai || ||

paap aur anyaay sabhee kuchh, is jagatee ka har ke ||
door bhaga deta duniya ke, daanav ko kshan bhar ke || ||

aise hee avataaree saeen, mrtyulok mein aakar ||
samata ka yah paath padhaaya, sabako apana aap mitaakar || ||

naam dvaaraka masjid ka, rakha shiradee mein saeen ne ||
daap, taap, santaap mitaaya, jo kuchh aaya saeen ne || ||

sada yaad mein mast raam kee, baithe rahate the saeen ||
pahar aath hee raam naam ko, bhajate rahate the saeen || ||

sookhee-rookhee taajee baasee, chaahe ya hove pakavaan ||
sauda pyaar ke bhookhe saeen kee, khaatir the sabhee samaan || ||

sneh aur shraddha se apanee, jan jo kuchh de jaate the ||
bade chaav se us bhojan ko, baaba paavan karate the || ||

kabhee-kabhee man bahalaane ko, baaba baag mein jaate the ||
pramudit man mein nirakh prakrti, aanandit ve ho jaate the || ||

rang-birange pushp baag ke, mand-mand hil-dul karake ||
beehad veeraane man mein bhee sneh salil bhar jaate the || ||

aisee sumadhur bela mein bhee, dukh aapaat, vipada ke maare ||
apane man kee vyatha sunaane, jan rahate baaba ko ghere || ||

sunakar jinakee karoonakatha ko, nayan kamal bhar aate the ||
de vibhooti har vyatha, shaanti, unake ur mein bhar dete the || ||

jaane kya adbhut shakti, us vibhooti mein hotee thee ||
jo dhaaran karate mastak par, dukh saara har letee thee || ||

dhany manuj ve saakshaat darshan, jo baaba saeen ke pae ||
dhany kamal kar unake jinase, charan-kamal ve parasae || ||

kaash nirbhay tumako bhee, saakshaat saeen mil jaata ||
varshon se ujada chaman apana, phir se aaj khil jaata || ||

gar pakadata main charan shree ke, nahin chhodata umrabhar || ||
mana leta main jaroor unako, gar roothate saeen mujh par || ||

|| Iti Shri Sai Chalisa Lyrics ||

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धन्यवाद्
पवन शास्त्री ( सुर सरिता टेक्नो )

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