Top 10 Chalisa Lyrics | चालीसा संग्रह | Chalisa Sangrah PDF Download Free

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Top 10 Chalisa Lyrics | चालीसा संग्रह | Chalisa Sangrah In Hindi

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Top 10 Chalisa Lyrics | चालीसा संग्रह | Chalisa Sangrah In Hindi :-

हनुमान चालीसा  दुर्गा चालीसा विष्णु चालीसा
भैरव चालीसा राम चालीसा  शिव चालीसा
कृष्ण चालीसा काली चालीसा बजरंग बाण 

यहाँ नीचे कुछ प्रमुख Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह, Chalisa Sangrah In Hindi दी गयी हैं –

कुछ प्रमुख देवी, देवताओं के चालीसा पाठ ( Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह| Chalisa Sangrah In Hindi ) आपकी सुविधा के लिए नीचे क्रम से दी जा रही हैं –

Shri Ram Chalisa Lyrics

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He Raja Ram Teri Aarti Utaru Lyrics

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

यहाँ Ram chalisa lyrics in hindi, श्री राम चालीसा लिरिक्स दिया गया है –

|| श्री राम चालीसा लिरिक्स

श्री रघुवीर भक्त हितकारी | सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ||
निशिदिन ध्यान धरे जो कोई |  त सम भक्त और नहिं होई ||

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं | ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाही |
दूत तुम्हार वीर हनुमाना | जासु प्रभाव तिहुँ पुर जाना ||

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला | रावण मारि सुरन प्रतिपाला |
तुम अनाथ के नाथ गुसाई | दीनन के हो सदा सहाई ||

ब्रह्मादिक तव पार न पावे | सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ||
चारिहु वेद भरत है साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी ||

गुण गावत शारद मन माहीं | सुरपति ताको पार न पाहीं ||
नाम तुम्हार लेत जो कोई |  ता सम धन्य और नहिं होई ||

राम नाम है अपरम्पारा | चारिउ वेदन जाहि पुकारा ||
गणपति नाम तुम्हारो लीनो | तिनको प्रथम पूज्य तुम कीनो ||

शेश रटत नित नाम तुम्हारा | महि को भार शीश पर धारा ||
फूल समान रहत सो भारा | पाव न कोऊ तुम्हरो पारा ||

भरत नाम तुम्हरो उर धारो | तासों कबहुं न रण में हारो ||
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा | सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ||

लखन तुम्हारे आज्ञा कारी | सदा करत संतन रखवारी ||
ताते रण जीते नहिं कोई | युद्ध जुरे यमहूं किन होई ||

महालक्ष्मी धर अवतारा | सब विधि करत पाप को छारा ||
सीता राम पुनीता गायो | भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ||

घट सों प्रकट भई सो आई | जाको देखत चन्द्र लजाई ||
सो तुमरे नित पांव पलोटत | नवो निधि चरणन में लोटत ||

सिद्ध अठारह मंगलकारी |  सो तुम पर जावै बलिहारी ||
औरहु जो अनेक प्रभुताई |  सो सीतापति तुमहिं बनाई ||

इच्छा ते कोटिन संसारा | रचत न लागत पल की बारा ||
जो तुम्हे चरणन चित लावै | ताकी मुक्ति अवसि हो जावै ||

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा | नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ||
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी | सत्य सनातन अन्तर्यामी ||

सत्य भजन तुम्हरो जो गावे | सो निश्चय चारों फल पावे ||
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं | तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं ||

सुनहु राम तुम तात हमारे | तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे ||
तुमहिं देव कुल देव हमारे | तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ||

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

जो कुछ हो सो तुम ही राजा | जय जय जय प्रभु राखो लाजा ||
राम आत्मा पोषण हारे | जय जय दशरथ राज दुलारे ||

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा | नमो नमो जय जगपति भूपा ||
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा | नाम तुम्हार हरत संतापा ||

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया | बजी दुन्दुभी शंख बजाया ||
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन मन धन ||

याको पाठ करे जो कोई | ज्ञान प्रकट ताके उर होई ||
आवागमन मिटै तिहि केरा | सत्य वचन माने शिर मेरा ||

और आस मन में जो होई | मनवांछित फल पावे सोई ||
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावे | तुलसी दल अरु फूल चढ़ावे ||

साग पत्र सो भोग लगावे | सो नर सकल सिद्घता पावे॥
अन्त समय रघुबरपुर जाई | जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥

श्री हरिदास कहै अरु गावे |  सो बैकुण्ठ धाम को पावे ||

|| श्री राम चालीसा लिरिक्स ॥ दोहा॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय |
हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय ||

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय |
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय || Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

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Hanuman chalisa lyrics In Hindi | हनुमान चालीसा लिरिक्स

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हनुमान चालीसा लिरिक्स दोहा :-

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि |
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार |
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||

हनुमान चालीसा लिरिक्स चौपाई :-

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर |
जय कपीस तिहुं लोक उजागर ||

रामदूत अतुलित बल धामा |
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी |
कुमति निवार सुमति के संगी ||

कंचन बरन बिराज सुबेसा |
कानन कुंडल कुंचित केसा ||

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै |
कांधे मूंज जनेऊ साजै ||

संकर सुवन केसरी नंदन |
तेज प्रताप महा जग बन्दन ||

विद्यावान गुनी अति चातुर |
राम काज करिबे को आतुर ||

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया |
राम लखन सीता मन बसिया ||

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा |
बिकट रूप धरि लंक जरावा ||

भीम रूप धरि असुर संहारे |
रामचंद्र के काज संवारे ||

लाय सजीवन लखन जियाये |
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ||

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई |
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ||

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं |
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ||

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा |
नारद सारद सहित अहीसा ||

जम कुबेर दिगपाल जहां ते |
कबि कोबिद कहि सके कहां ते ||

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा |
राम मिलाय राज पद दीन्हा ||

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना |
लंकेस्वर भए सब जग जाना ||

जुग सहस्र जोजन पर भानू |
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। |
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ||

दुर्गम काज जगत के जेते |
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||

राम दुआरे तुम रखवारे |
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ||

सब सुख लहै तुम्हारी सर ना |
तुम रक्षक काहू को डरना ||

आपन तेज सम्हारो आपै |
तीनों लोक हांक तें कांपै ||

भूत पिसाच निकट नहिं आवै |
महाबीर जब नाम सुनावै ||

Hanuman Chalisa Lyrics And Benefits, श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स

नासै रोग हरै सब पीरा |
जपत निरंतर हनुमत बीरा ||

संकट तें हनुमान छुड़ावै |
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ||

सब पर राम तपस्वी राजा |
तिन के काज सकल तुम साजा ||

और मनोरथ जो कोई लावै |
सोइ अमित जीवन फल पावै ||

चारों जुग परताप तुम्हारा |
है परसिद्ध जगत उजियारा ||

साधु-संत के तुम रखवारे |
असुर निकंदन राम दुलारे ||

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता |
अस बर दीन जानकी माता ||

राम रसायन तुम्हरे पासा |
सदा रहो रघुपति के दासा ||

तुम्हरे भजन राम को पावै |
जनम-जनम के दुख बिसरावै ||

अन्तकाल रघुबर पुर जाई |
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई ||

और देवता चित्त न धरई |
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ||

संकट कटै मिटै सब पीरा |
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||

जै जै जै हनुमान गोसाईं |
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ||

जो सत बार पाठ कर कोई |
छूटहि बंदि महा सुख होई ||

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा |
होय सिद्धि साखी गौरीसा ||

तुलसीदास सदा हरि चेरा |
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा || Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

हनुमान चालीसा लिरिक्स दोहा :-

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप |
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ||

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श्री दुर्गा चालीसा लिरिक्स | Durga Chalisa Lyrics

दुर्गा चालीसा का पाठ यदि नियमित रूप से 108 बार किया जाय तो दुर्गा चालीसा का पाठ इतना अधिक प्रभावशाली होता है कि जिससे जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है | दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics को 108 बार पढने से शारीरिक व मानशिक रोग, तनाव एवं प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है | सभी को दुर्गा चालीसा का पाठ 108 बार करना चाहिए | Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

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दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics दिया जा रहा है और उम्मीद करता हूँ कि दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics आपके लिए जरूर helpful साबित होगा | दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics

चालीसा- दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics/Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

यहाँ दुर्गा चालीसा लिरिक्स, Durga Chalisa Lyrics In Hindi दिया गया है –

नमो नमो दुर्गे सुख करनी | नमो – नमो अंबे दुःख हरनी ||
निरंकार है ज्योति तुम्हारी | तिहूं लोक फैली उजियारी ||

शशि ललाट मुख महाविशाला | नेत्र लाल भृकुटि विकराला ||
रूप मातु को अधिक सुहावे | दरश करत जन अति सुख पावे ||

तुम संसार शक्ति लै कीना | पालन हेतु अन्न धन दीना ||
अन्नपूर्णा हुई जग पाला | तुम ही आदि सुन्दरी बाला ||

प्रलयकाल सब नाशन हारी | तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ||
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें | ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ||

रूप सरस्वती को तुम धारा | दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ||
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा | परगट भई फाड़कर खम्बा ||

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो | हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ||
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं | श्री नारायण अंग समाहीं ||

क्षीरसिन्धु में करत विलासा | दयासिन्धु दीजै मन आसा ||
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी | महिमा अमित न जात बखानी ||

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

मातंगी अरु धूमावति माता | भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ||
श्री भैरव तारा जग तारिणी | छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ||

केहरि वाहन सोह भवानी | लांगुर वीर चलत अगवानी ||
कर में खप्पर खड्ग विराजै | जाको देख काल डर भाजै ||

सोहै अस्त्र और त्रिशूला | जाते उठत शत्रु हिय शूला ||
नगरकोट में तुम्हीं विराजत | तिहुँलोक में डंका बाजत ||

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे | रक्तन बीज शंखन संहारे ||
महिषासुर नृप अति अभिमानी | जेहि अघ भार मही अकुलानी ||

रूप कराल कालिका धारा | सेन सहित तुम तिहि संहारा ||
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब | भई सहाय मातु तुम तब तब ||

आभा पुरी अरु बासव लोका | तब महिमा सब रहें अशोका ||
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी | तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ||

प्रेम भक्ति से जो यश गावें | दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ||
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई | जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ||

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी | योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ||
शंकर आचारज तप कीनो | काम क्रोध जीति सब लीनो ||

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को | काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ||
शक्ति रूप का मरम न पायो | शक्ति गई तब मन पछितायो ||

शरणागत हुई कीर्ति बखानी | जय जय जय जगदम्ब भवानी ||
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा | दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ||

मोको मातु कष्ट अति घेरो | तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ||
आशा तृष्णा निपट सतावें | रिपु मुरख मोही डरपावे ||

शत्रु नाश कीजै महारानी | सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ||
करो कृपा हे मातु दयाला | ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला ||

जब लगि जियऊं दया फल पाऊं | तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ||
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै | सब सुख भोग परमपद पावै ||

देवीदास शरण निज जानी | करहु कृपा जगदम्ब भवानी ||

|| इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण || दुर्गा चालीसा लिरिक्स || Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह ||

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Shri Kaali Chalisa Lyrics | श्री काली चालीसा लिरिक्स

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Shri Kaali Chalisa Lyrics

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

यहाँ Kaali Chalisa Lyrics In Hindi, श्री काली चालीसा लिरिक्स दिया गया है –

Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

श्री काली चालीसा दोहा –

जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार
महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ||

अरि मद मान मिटावन हारी | मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ||1||
अष्टभुजी सुखदायक माता | दुष्टदलन जग में विख्याता ||2||

भाल विशाल मुकुट छवि छाजै | कर में शीश शत्रु का साजै ||3||
दूजे हाथ लिए मधु प्याला | हाथ तीसरे सोहत भाला ||4||

चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे | छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे ||5||
सप्तम करदमकत असि प्यारी | शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ||6||

अष्टम कर भक्तन वर दाता | जग मनहरण रूप ये माता ||7||
भक्तन में अनुरक्त भवानी | निशदिन रटें ॠषी-मुनि ज्ञानी ||8||

महशक्ति अति प्रबल पुनीता | तू ही काली तू ही सीता ||9||
पतित तारिणी हे जग पालक | कल्याणी पापी कुल घालक ||10||

शेष सुरेश न पावत पारा | गौरी रूप धर्यो इक बारा ||11||
तुम समान दाता नहिं दूजा | विधिवत करें भक्तजन पूजा ||12||

रूप भयंकर जब तुम धारा | दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ||13||
नाम अनेकन मात तुम्हारे | भक्तजनों के संकट टारे ||14||

कलि के कष्ट कलेशन हरनी | भव भय मोचन मंगल करनी ||15||
महिमा अगम वेद यश गावैं | नारद शारद पार न पावैं ||16||

भू पर भार बढ्यौ जब भारी | तब तब तुम प्रकटीं महतारी ||17||
आदि अनादि अभय वरदाता | विश्वविदित भव संकट त्राता ||18||

कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा | उसको सदा अभय वर दीन्हा ||19||
ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा | काल रूप लखि तुमरो भेषा ||20||

कलुआ भैंरों संग तुम्हारे | अरि हित रूप भयानक धारे ||21||
सेवक लांगुर रहत अगारी | चौसठ जोगन आज्ञाकारी ||22||

त्रेता में रघुवर हित आई | दशकंधर की सैन नसाई ||23||
खेला रण का खेल निराला | भरा मांस-मज्जा से प्याला ||24||

रौद्र रूप लखि दानव भागे | कियौ गवन भवन निज त्यागे ||25||
तब ऐसौ तामस चढ़ आयो | स्वजन विजन को भेद भुलायो ||26||

ये बालक लखि शंकर आए | राह रोक चरनन में धाए ||27||
तब मुख जीभ निकर जो आई | यही रूप प्रचलित है माई ||28||

बाढ्यो महिषासुर मद भारी | पीड़ित किए सकल नर-नारी ||29||
करूण पुकार सुनी भक्तन की | पीर मिटावन हित जन-जन की ||30||

तब प्रगटी निज सैन समेता | नाम पड़ा मां महिष विजेता ||31||
शुंभ निशुंभ हने छन माहीं | तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं ||32||

मान मथनहारी खल दल के | सदा सहायक भक्त विकल के ||33||
दीन विहीन करैं नित सेवा | पावैं मनवांछित फल मेवा ||34||

संकट में जो सुमिरन करहीं | उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ||35||
प्रेम सहित जो कीरति गावैं | भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ||36||

काली चालीसा जो पढ़हीं | स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं ||37||
दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा | केहि कारण मां कियौ विलम्बा ||38||

करहु मातु भक्तन रखवाली | जयति जयति काली कंकाली ||39||
सेवक दीन अनाथ अनारी | भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ||40||

श्री काली चालीसा दोहा –

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ |
तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ || Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

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पुत्र प्राप्ति के लिए हर रोज Shri Gopal Chalisa का पाठ करना चाहिए | Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

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श्री गोपाल चालीसा दोहा –

श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कृल |
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल ||

श्री गोपाल चालीसा चौपाई –

जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी, दष्ट दलन लीला अवतारी |
जो कोई तुम्हारी लीला गावै, बिन श्रम सकल पदारथ पावे ||

श्री वसुदेव देवकी माता, प्रकट भये संग हलधर भ्राता |
मथुरा से प्रभु गोकुल आये, नन्द भवन में बजत बधाये ||

जो विष देना पूतना आई, सो मुक्ति का धाम पठाई |
तृणावर्त राक्षस संहार्यौ, पग बढ़ाये सकटासुर मार्यौ ||

खेल खेल में माटी खाई, मुख में सब जग दियो दिखाई |
गोपिन घर घर माखन खायो, जसुमति बाल केलि सुख पायो ||

ऊखल सों निज अंग बधाई, यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई |
बकासुर की चोंच विदारी, विकट अधासुर दियो सँहारी ||

ब्राह्मण बालक वत्स चुराये, मोहन को मोहन हित आये |
बाल वत्स सब बने मुरारी, ब्रह्मा विनय करी तब भारी ||

काली नाग नाथि भगवान, दावानल को कीन्हों पाना |
सजन संग खेलत सुख पायो, श्रीदेवी निज कन्ध चढ़ायो ||

चीर हरण करि सीख सिखाई, नख पर गिरवर लियो उठाई |
दरश यज्ञ पत्नी को दीन्हों, राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों ||

नन्दहिं वरुण लोक से लाये, ग्वालन को निज लोक दिखाये |
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई, अति सुख दीन्हों रास रचाई ||

अजगर से पितृ चरण छुड़ायो, शंखचूड़ को मोड़ गिरायो |
व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये, मारि कंस यदुवंशी हसाये ||

मात पिता की यन्दि छुड़ाई, सान्दीपनि गृह विद्या पाई |
पनि पठयौ ब्रज ऊधो ज्ञानी, प्रेम देखि माथि सकल भुलानी ||

कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी, हरि लाये रुक्मणी सुकुमारी |
भस्मासुर हनि भक्त छुड़ाये सुरन जीति सुरतरु महि, लाये ||

दन्तवक्र शिशुपाल संहारे, खग मृग मृग अरु बधिक उधारे |
दीन सुदामा गणपति कीन्हों, पारथ रथ सारथि यश लीन्हों ||

गीता ज्ञान सिखावन हारे, अर्जुन मोहि मिटावन हारे |
केला भक्त विदुर घर पायो, युद्ध महाभारत रचवायो ||

द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो, गर्भ परीक्षित जरत बचायो |
कच्छ मच्छ वाराह अहीशा, बावन कल्की बुद्धि मुनीशा ||

है नृसिंह प्रह्लाद उतार्यो, राम रूप धरि रावण मारो |
जय मधु कैटभ दैत्य हनैया, अम्बरीष प्रिय चक्र धरेया ||

व्याध अजामिल दीन्हें तारी, शबरी अरु गणिका सी नारी |
गरुड़ासन गज फन्द निकंदन, देहु दरश ध्रुव नैना नन्दन ||

देहु शुद्ध सन्तन कर सङ्गा, बड़े प्रेम भक्ति रस रङ्गा |
देहु दिव्य वृन्दावन बासा, छूटै मृग तृष्णा जग आशा ||

तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद, शुक सनकादिक ब्रह्मा विशारद |
जय जय राधा रमण कपाला, हरण सकल संकट भ्रम जाला ||

बिनसैं बिघन रोग दुःख भारी, जो सुमिरै जगपति गिरधारी |
जो सत बार पढ़े चालीसा। देहि सकल बाँछित फल शीशा ||

श्री गोपाल चालीसा छन्द –

गोपाल चालीसा पढ़े नित, नेम सों चित्त लावई |
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिंधवाई ||
संसार सुख सम्पत्ति सकल,जो भक्तजन सन महँ चहें |
जयरामदेव सदैव सो, गुरुदेव दाया सों लहैं ||

श्री गोपाल चालीसा दोहा –

प्रणत पाल आश्रय शरण, करुणा-सिंधु ब्रजेश |
चालीसा के संग मोहि, अपनावाहु प्राणेश || Top 10 Chalisa Lyrics, चालीसा संग्रह

 

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धन्यवाद्
पवन शास्त्री ( सुर सरिता टेक्नो )

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