Shiv Amritwani Lyrics Full शिव अमृतवाणी लिरिक्स – भाग 1 से 5 तक

इस आर्टिकल में शिव अमृतवाणी लिरिक्स – भाग 1 से 5 तक, Shiv Amritwani Lyrics का हिंदी और English Lyrics भी दिया जा रहा है और उम्मीद करता हूँ कि यह शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics जरूर Helpful होगा |

शिव अमृतवाणी लिरिक्स | Shiv Amritwani Lyrics In Hindi

यहाँ शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics In Hindi दिया गया है-

Shiv Amritwani Lyrics in Hindi, यह प्रसिद्ध अनुराधा पौडवाल द्वारा गया गया है, T-Series presents most popular Hindi Bhajan -Shiv Amritvani by Anuradha Paudwal.

Shiv Bhajan – Shiv Amritwani Lyrics Full, शिव अमृतवाणी लिरिक्स
Album – Shiv Amritwani
Singer – Anuradha Paudwal
Music Label – T-Series शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics

शिव अमृतवाणी लिरिक्स,  Shiv Amritwani Lyrics In Hindi भाग – 1

Nagar me jogi aaya Lyrics

शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics

अन्य भजन-

कल्पतरु पुन्यातामा, प्रेम सुधा शिव नाम
हितकारक संजीवनी, शिव चिंतन अविराम
पतिक पावन जैसे मधुर, शिव रसन के घोलक
भक्ति के हंसा ही चुगे, मोती ए अनमोल
जैसे तनिक सुहागा, सोने को चमकाए
शिव सुमिरन से आत्मा, अध्भुत निखरी जाए
जैसे चन्दन वृक्ष को, दस्ते नहीं है नाग
शिव भक्तो के चोले को, कभी लगे न दाग

ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय

दया निधि भूतेश्वर, शिव है चतुर सुजान
कण कण भीतर है, बसे नील कंठ भगवान
चंद्र चूड के त्रिनेत्र, उमा पति विश्वास
शरणागत के ए सदा, काटे सकल क्लेश
शिव द्वारे प्रपंच का, चल नहीं सकता खेल
आग और पानी का, जैसे होता नहीं है मेल
भय भंजन नटराज है, डमरू वाले नाथ
शिव का वंधन जो करे, शिव है उनके साथ || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय

लाखो अश्वमेध हो, सोउ गंगा स्नान
इनसे उत्तम है कही, शिव चरणों का ध्यान
अलख निरंजन नाद से, उपजे आत्मा ज्ञान
भटके को रास्ता मिले, मुश्किल हो आसान
अमर गुणों की खान है, चित शुद्धि शिव जाप
सत्संगती में बैठ कर, करलो पश्चाताप
लिंगेश्वर के मनन से, सिद्ध हो जाते काज
नमः शिवाय रटता जा, शिव रखेंगे लाज

ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय

शिव चरणों को छूने से, तन मन पवन होए
शिव के रूप अनूप की, समता करे न कोई
महा बलि महा देव है, महा प्रभु महा काल
असुराणखण्डन भक्त की, पीड़ा हरे तत्काल
शर्वा व्यापी शिव भोला, धर्म रूप सुख काज
अमर अनंता भगवंता, जग के पालन हार
शिव करता संसार के, शिव सृष्टि के मूल
रोम रोम शिव रमने दो, शिव न जईओ भूल || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय

शिव अमृतवाणी लिरिक्स,  Shiv Amritwani Lyrics In Hindi भाग – 2 और 3

शिव अमृतवाणी लिरिक्स,  Shiv Amritwani Lyrics

शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics

शिव अमृत की पावन धारा
धो देती है हर कष्ट हमारा
शिव का कार्य सदा सदा सुखदाई
शिव के बिन है कौन सहाई
शिव की निशदिन निशदिन की जो भक्ति
देंगे शिव हर भय से मुक्ति
माथे धरो शिव नाम नाम नाम की धुली
टूट जाएगी यम की सूली सूली

शिव का साधक दुख ना माने
शिव को हर पल सम्मुख जाने
सौंप दी जिसने शिव को डोर
लुटे ना उसको पांचों चोर
शिव सागर में जो जन डूबे
संकट से वह हंस वह हंस हंस के जूझे

शिव है जिनके संगी साथी
उन्हें ना विपदा कभी सताती
शिव भक्तन का पकड़े हाथ
शिव संतन की सदा ही साथ
शिव ने है ब्रह्मांड रचाया
तीनो लोक है है शिव की माया || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

जिन पर शिव की करुणा होती
वह कंकड़ बन जाते मोती मोती
शिव संग तान तान प्रेम की जोड़ो
शिव के चरण कभी ना ना कभी ना ना छोड़ो

शिव में मनावा मनावा मन को रंग ले
शिव मस्तक की रेखा बदले की रेखा बदले
शिव जन की नस नस जाने
बुरा भला वह सब पहचाने पहचाने
अजर अमर है शिव अविनाशी
शिव पूजन किया किया कटे चौरासी
यहां वहां शिव सर्व व्यापक
शिव की दया के बनिए याचक
शिव को दी जो जो दी जो जो सच्ची निष्ठा
होने ना देगा शिव को रुष्ठा || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव हे श्रद्धा के ही भूखे
भोग लगे चाहे रूखे सूखे सूखे
भावना शिव को बस में करती
प्रीत से ही तो प्रीत है बढ़ती
शिव कहते हैं मन से से हैं मन से से जागो
प्रेम करो अभिमान त्यागो
दुनिया का मोह त्याग शिव में रहिए लीन
सुख-दुख हानि लाभ तो शिव के ही है अधीन
भस्म रमैया पार्वती वल्लभ
शिव फलदायक शिव है दुर्लभ

महा कौतुकी है शिव शंकर
त्रिशूल धारी शिव अभयंकर
शिव की रचना धरती अंबर
देवों के स्वामी शिव है दिगम्बर
काल दहन शिव रुण्डन पोषित
होने ना देते धर्म को दूषित दूषित
दुर्गा पति शिव शिव गिरिराजनाथ
देते हैं सुखों की प्रभात
सृष्टि कर्ता त्रिपुर धारी
शिव की महिमा कही ना जाती जाती

दिव्या तेज के रवि रवि है शंकर
पूजे हम सब तभी है शंकर
शिव सम सब कोई और दानी
शिव की भक्ति है कल्याणी
सबकी मनोरथ सिद्ध कर देती
सबकी चिंता शिव हर लेते
बम भोला अवधूत स्वरूपा
शिव दर्शन है अति अनूपा
अनुकंपा का शिव है झरना
हरने वाले सब की तृष्णा || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

भूतों के अधिपति है शंकर
निर्मल मन शुभ मति है शंकर है शंकर
काम के शत्रु बिस के नाशक
शिव महायोगी भाई विनाशक
रूद्र रूप शिव महा महा तेजस्वी
शिव के जैसा कौन तपस्वी
शिव है जग के सृजन हारे
बंधु सखा शिव इष्ट हमारे
गो ब्राम्हण के वे हितकारी
कोई शिव सा पर उपकारी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव करुणा के स्रोत है
शिव के करियो प्रीत
शिव की परम पुनीत है
शिव साचा मन मीत
शिव सर्पों के भूषण धारी धारी
पाप के भाषण शिव त्रिपुरारी

जटा जूट शिव चंद्रशेखर
विश्व के रक्षक कला कलेश्वर
शिव की वंदना करने वाला
धन वैभव पा जाए निराला
शिव सा दयालु और ना दूजा
कष्ट निवारक शिव की पूजा
पंचमुखी जब रूप दिखावे
दानव दल में भय छा जावे
डम डम डमरू जब भी बोले
चोर निशाचर का मन डोले
गोट घाट जब भंग चढ़ावे
क्या है लीला समझ ना आवे || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव है योगी शिव सन्यासी
शिव ही है कैलाश के वासी
शिव का दास सदा निर्भीक है
शिव के धाम बड़े रमणीक
शिव भृकुटि से भैरव जन्मे
शिव की मूरत रखो मन में
शिव का अर्चन मंगलकारी
मुक्ति साधक भव भय हारी हारी

भक्तवत्सल दीन दयाला
ज्ञान सुधा है शिव कृपाला
शिव नाम की नौका है न्यारी
जिसने सबकी चिंता टारी
जीवन सिंधु सहज जो तरना
शिव का हर पल नाम सुमिरना
तारकासुर को मारने वाले
शिव है भक्तों के रखवाले रखवाले
शिव की लीला के गुण गाना
शिव को भूलकर ना बिसरा ना

अंधकासुर के देव देव बचाए
शिव के अद्भुत खेल दिखाए
शिव चरणों से लिपटे रहिए
मुख के शिव शिव जय शिव कहिए
भस्मासुर को वर दे डाला
शिवा है कैसा भोला भाला
शिव तीर्थ का दर्शन कीजो
मनचाहे वर शिव से लीजो || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव शंकर के जाप से मिट जाते सब रोग
शिव का अनुग्रह होते ही पीड़ा ना देते शोक
ब्रह्मा विष्णु शिव अनुगामी
शिव है दीन हिन के स्वामी

निर्बल के बल रूप हैं शंभु
प्यासे को जल रूप है शंभू
रावण शिव का भक्त निराला
शिव ने दी दस शीश की माला
गर्व से जब कैलाश उठाया
शिव ने अंगूठे से था दबा
दुख निवारण नाम है शिव का
रत्न है और बिन दाम शिव का

शिव है सब के भाग्य विधाता के भाग्य विधाता
शिव का सुमिरन सुमिरन है फल दाता
महादेव शिव औघड़ दानी
बायें अंग में सजे भवानी
शिव शक्ति का मेल का मेल निराला
शिव का हर एक खेल निराला
संभर नामी भक्तों को तारा तारा को तारा तारा
चंद्रसेन का शोक निवारण
पिंगला ने जब शिव को ध्याया
देह छुट्टी और मोक्ष पाया पाया
गोकर्ण कि चन चूका अनारी
भवसागर से पार उतारी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

अनुसुइया ने किया आराधना
टूटे चिंता के सब सब बंधन
बेल पत्तों से पूजा करें चण्डली
शिव की अनुकंपा हुई निराली
मार्कंडेय की भक्ति है शिव
दुर्वासा की शक्ति है शिव
राम प्रभु ने शिव अराधा
सेतु की हर टल गई बाधा

धनुष बाण था पाया शिव ने
श्री कृष्ण ने था जब ध्याया
दस पुत्रों का वर था पाया
हम सेवक तो स्वामी शिव है है
अनहद अंतर्यामी शिव है
दीन दयाल शिव मेरे, शिव के रहियो दास
घाट घाट की शिव जानते शिव पर रख विश्वास
परशुराम ने शिव गुण गाया गाया
कीन्हा तप और फरसा पाया
निर्गुण भी शिव निराकार
शिव हैं सृष्टि के आधार || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव ही होते मूर्तिमान
शिव ही करते जग कल्याण
शिव में व्यापक दुनिया सारी
शिव की सिद्धि है भयहारी
शिव ही बाहर से ही अंदर
शिव की रचना सात समुंदर
शिव है हर एक हर एक के मन के भीतर
शिव हर एक कण कण के भीतर
तन में बैठा शिव ही बोले
दिल की धड़कन में शिव डोले

हम कठपुतली शिव ही नचाता
नैनो को पर नजर ना आता
माटी के रंगदार खिलौने
सांवल सुंदर और सलोनी
शिव हो जोड़े शिव हो तोड़े
शिव तो किसी को खुला ना छोड़े
आत्मा शिव परमात्मा शिव है है
दया भाव धर्मात्मा शिव है
शिव जी दीपक शिव ही बाती
शिव जो नहीं तो सब कुछ माटी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

सब देवों में जेष्ठ शिव है
सकल गुणों में श्रेष्ठ शिव है है
जब यह तांडव करने लगता
ब्रह्मांड सारा डर नहीं लगता
तीसरा चछु जब-जब खोलें
त्राहि-त्राहि जब जग बोले
शिव को तुम प्रसन्न ही रखना
आस्था लग्न बनाए रखना
विष्णु ने की शिव शिव की पूजा
कमल चढ़ाऊं मन में सुझा

एक कमल जो कम था पाया
अपना सुंदर नयन चड़ाया
साक्षात तब शिव थे आए
कमलनयन विष्णु कहलाए कहलाए
इंद्रधनुष के रंगों में शिव
संतों के सत्संगों में शिव
महाकाल के भक्त को मार ना सकता काल
द्वार खड़े यमराज को शिव देते टाल
यज्ञ सुदन महा रौद्र शिव है
आनंदमूर्ति नटवर शिव है है || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव ही है श्मशान के वासी
शिव कांटे मृत्युलोक की फांसी
व्याघ्र चरम कमर में सोहे
शिव भक्तों के मन को मोहे
नंदी गण पर करे सवारी
आदित्य नाथ शिव गंगा धारी
काल में भी तो काल है शंकर है शंकर
विषधारी गज पालक है शंकर
महा सती के पति है शंकर
दीन सखा शुभ मति है शंकर

लाखों शशि के सम मुख वाले
भंग धतूरे के मतवाले
काल भैरव भूतों के स्वामी
शिव से कांपे सब फलगामी
शिव कपाली शिव भस्मागी
शिव की दया हर जीव ने मांगी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

मंगलकर्ता मंगलहारी
देव शिरोमणि महासुखकारी
जल तथा विल्व करे जो अर्पण
श्रधा भाव से करे समर्पण
शिव सदा उनकी करते रक्षा
सत्यकर्म की देते शिक्षा

बासुकि नाग कंठ की शोभा
आशुतोष है शिव महादेवा
विश्वमुर्ति करुनानिधान
महा मृत्युंजय शिव भगवान
शिव धारे रुद्राक्ष की माला
नीलेश्वर शिव डमरू वाला
पाप का शोधक मुक्ति साधन
शिव करते निर्दई का मर्दन
शिव सुमरिन के नीर से धूल जाते पाप
पवन चले नाम की उड़ते दुःख संताप || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

पंचाक्षर का मन्त्र शिव है
साक्षात् सर्वेश्वर शिव है
शिव को नमन करे जग सारा
सिव का है ए सकल पसारा
क्षीर सागर को मथने वाले
रिधिसीधी सुख देने वाले
अहंकार के शिव है विनाशक
धर्म दीप ज्योति प्रकाशक
शिव बिछुवन के कुण्डलधारी
शिव की माया सृष्टि सारी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

महानन्दा ने किया सिव चिंतन
रुद्राक्ष माला किन्ही धारण
भवसिन्धु से शिव ने तारा
शिव अनुकम्पा अपरम्पारा
त्रि जगत के यश है शिवजी
दिव्य तेज गौरीश है शिवजी
महाभार को सहने वाले
वैर रहित दया करने वाले
गुण स्वरूप है शिव अनुपा
अम्बानाथ है शिव तपरूपा

शिव चण्डीश परम सुख ज्योति
शिव करुणा के उज्जवल मोती
पुण्यात्मा शिव योगेश्वर
महादयालु सिव शरणेश्वर
शिव चरणन पे मस्तक धरिए
श्रधा भाव से अर्चन करिए
मन को शिवाला रूप बना लो
रोम रोम में शिव को रमा लो
दशों दिशाओं में शिव दृष्टि
सब पर सिव की कृपा दृष्टि || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

सिव को सदा ही सम्मुख जानो
कण-कण बीच बसे ही मानो
शिव को सौंपो जीवन नैया
शिव है संकट टाल खिवैया
अंजलि बाँध करे जो वंदन
भय जंजाल के टूटे बन्धन

जिनकी रक्षा शिव करे, मारे न उसको कोय
आग की नदिया से बचे, बाल ना बांका होय
शिव दाता भोला भण्डारी
शिव कैलाशी कला बिहारी
सगुण ब्रह्म कल्याण कर्ता
विघ्न विनाशक बाधा हर्ता
शिव स्वरूपिणी सृष्टि सारी
शिव से पृथ्वी है उजियारी || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

गगन दीप भी माया शिव की
कामधेनु है छाया शिव की
गंगा में शिव , शिव मे गंगा
शिव के तारे तुरत कुसंगा
शिव के कर में सजे त्रिशूला
शिव के बिना ए जग निर्मूला
.स्वर्णमई शिव जटा निराळी
शिव शम्भू की छटा निराली
जो जन शिव की महिमा गाए
शिव से फल मनवांछित पाए
शिव पग पँकज सवर्ग समाना
शिव पाए जो तजे अभिमाना

शिव का भक्त ना दुःख मे डोलें
शिव का जादू सिर चढ बोले
परमानन्द अनन्त स्वरूपा
शिव की शरण पड़े सब कूपा
शिव की जपियो हर पल माळा
शिव की नजर मे तीनो क़ाला
अन्तर घट मे इसे बसा लो
दिव्य जोत से जोत मिला लो
नम: शिवाय जपे जो स्वासा
पूरीं हो हर मन की आसा || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

परमपिता परमात्मा पूरण सच्चिदानन्द
शिव के दर्शन से मिले सुखदायक आनन्द
शिव से बेमुख कभी ना होना
शिव सुमिरन के मोती पिरोना
जिसने भजन है शिव के सीखे
उसको शिव हर जगह ही दिखे
प्रीत में शिव है शिव में प्रीती
शिव सम्मुख न चले अनीति

शिव नाम की मधुर सुगन्धी
जिसने मस्त कियो रे नन्दी
शिव निर्मल निर्दोष संजय निराले
शिव ही अपना विरद संभाले
परम पुरुष शिव ज्ञान पुनीता
भक्तो ने शिव प्रेम से जीता
आंठो पहर अराधीय ज्योतिर्लिंग शिव रूप
नयनं बीच बसाइए शिव का रूप अनूप
लिंग मय सारा जगत हैं || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

लिंग धरती आकाश
लिंग चिंतन से होत हैं सब पापो का नाश
लिंग पवन का वेग हैं
लिंग अग्नि की ज्योत
लिंग से पाताल हैँ लिंग वरुण का स्त्रोत

लिंग से हैं वनस्पति
लिंग ही हैं फल फूल
लिंग ही रत्न स्वरूप हैं
लिंग माटी निर्धूप
लिंग ही जीवन रूप हैं
लिंग मृत्युलिंगकार
लिंग मेघा घनघोर हैं
लिंग ही हैं उपचार
ज्योतिर्लिंग की साधना करते हैं तीनो लोग
लिंग ही मंत्र जाप हैं
लिंग का रूम श्लोक
लिंग से बने पुराण
लिंग वेदो का सार
रिधिया सिद्धिया लिंग हैं
लिंग करता करतार

प्रातकाल लिंग पूजिए पूर्ण हो सब काज
लिंग पे करो विश्वास तो लिंग रखेंगे लाज
सकल मनोरथ से होत हैं दुखो का अंत
ज्योतिर्लिंग के नाम से सुमिरत जो भगवंत
मानव दानव ऋषिमुनि ज्योतिर्लिंग के दास
सर्व व्यापक लिंग हैं पूरी करे हर आस

शिव रुपी इस लिंग को पूजे सब अवतार
ज्योतिर्लिंगों की दया सपने करे साकार
लिंग पे चढ़ने वैद्य का जो जन ले परसाद
उनके ह्रदय में बजे… शिव करूणा का नाद
महिमा ज्योतिर्लिंग की जाएंगे जो लोग
भय से मुक्ति पाएंगे रोग रहे न शोब || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव के चरण सरोज तू ज्योतिर्लिंग में देख
सर्व व्यापी शिव बदले भाग्य तीरे
डारीं ज्योतिर्लिंग पे गंगा जल की धार
करेंगे गंगाधर तुझे भव सिंधु से पार
चित सिद्धि हो जाए रे लिंगो का कर ध्यान
लिंग ही अमृत कलश हैं लिंग ही दया निधान

ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय.. || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव अमृतवाणी लिरिक्स,  Shiv Amritwani Lyrics In Hindi भाग – 4 और 5

Shiv Tandav Stotram Lyrics With Meaning, शिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित

शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics

ज्योतिर्लिंग है शिव की ज्योति, ज्योतिर्लिंग है दया का मोती
ज्योतिर्लिंग है रत्नों की खान, ज्योतिर्लिंग में रमा जहान
ज्योतिर्लिंग का तेज़ निराला, धन सम्पति देने वाला
ज्योतिर्लिंग में है नट नागर, अमर गुणों का है ए सागर
ज्योतिर्लिंग की की जो सेवा, ज्ञान पान का पाओगे मेवा
ज्योतिर्लिंग है पिता सामान, सष्टि इसकी है संतान || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

ज्योतिर्लिंग है इष्ट प्यारे, ज्योतिर्लिंग है सखा हमारे
ज्योतिर्लिंग है नारीश्वर, ज्योतिर्लिंग है शिव विमलेश्वर
ज्योतिर्लिंग गोपेश्वर दाता, ज्योतिर्लिंग है विधि विधाता
ज्योतिर्लिंग है शर्रेंडश्वर स्वामी, ज्योतिर्लिंग है अन्तर्यामी
सतयुग में रत्नो से शोभित, देव जानो के मन को मोहित

ज्योतिर्लिंग है अत्यंत सुन्दर, छत्ता इसकी ब्रह्माण्ड अंदर
त्रेता युग में स्वर्ण सजाता, सुख सूरज ए ध्यान ध्वजाता
सक्ल सृष्टि मन की करती, निसदिन पूजा भजन भी करती
द्वापर युग में पारस निर्मित, गुणी ज्ञानी सुर नर सेवी
ज्योतिर्लिंग सबके मन को भाता, महमारक को मार भगाता

कलयुग में पार्थिव की मूरत, ज्योतिर्लिंग नंदकेश्वर सूरत
भक्ति शक्ति का वरदाता, जो दाता को हंस बनता
ज्योतिर्लिंग पर पुष्प चढ़ाओ, केसर चन्दन तिलक लगाओ
जो जान करें दूध का अर्पण, उजले हो उनके मन दर्पण

ज्योतिर्लिंग के जाप से तन मन निर्मल होए
इसके भक्तों का मनवा करे न विचलित कोई || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

सोमनाथ सुख करने वाला, सोम के संकट हरने वाला
दक्ष श्राप से सोम छुड़ाया, सोम है शिव की अद्भुत माया
चंद्र देव ने किया जो वंदन, सोम ने काटे दुःख के बंधन
ज्योतिर्लिंग है सदा सुखदाई, दीन हीन का सहाई
भक्ति भाव से इसे जो ध्याए, मन वाणी शीतल तर जाए

शिव की आत्मा रूप सोम है प्रभु परमात्मा रूप सोम है
यंहा उपासना चंद्र ने की, शिव ने उसकी चिंता हर ली
इसके रथ की शोभा न्यारी, शिव अमृत सागर भवभयधारी
चंद्र कुंड में जो भी नहाए, पाप से वे जन मुक्ति पाए
6 कुष्ठ सब रोग मिटाए, नाया कुंदन पल में बनावे || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

मलिकार्जुन है नाम न्यारा, शिव का पावन धाम प्यारा
कार्तिकेय है जब शिव से रूठे, माता पिता के चरण है छूते
श्री शैलेश पर्वत जा पहुंचे, कष्ट भय पार्वती के मन में
प्रभु कुमार से चली जो मिलने, संग चलना माना शंकर ने
श्री शैलेश पर्वत के ऊपर, गए जो दोनों उमा महेश्वर

उन्हें देखकर कार्तिकेय उठ भागे, और ुमार पर्वत पर विराजे
जंहा श्रित हुए पारवती शंकर, काम बनावे शिव का सुन्दर
शिव का अर्जन नाम सुहाता, मलिका है मेरी पारवती माता
लिंग रूप हो जहाँ भी रहते, मलिकार्जुन है उसको कहते
मनवांछित फल देने वाला, निर्बल को बल देने वाला

ज्योतिर्लिंग के नाम की ले मन माला फेर
मनोकामना पूरी होगी लगे न चिन भी देर || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

उज्जैन की नदी क्षिप्रा किनारे, ब्राह्मण थे शिव भक्त न्यारे
दूषण दैत्य सताता निसदिन, गर्म द्वेश दिखलाता जिस दिन
एक दिन नगरी के नर नारी, दुखी हो राक्षस से अतिहारी
परम सिद्ध ब्राह्मण से बोले, दैत्य के डर से हर कोई डोले
दुष्ट निसाचर छुटकारा, पाने को यज्ञ प्यारा
ब्राह्मण तप ने रंग दिखाए, पृथ्वी फाड़ महाकाल आए

राक्षस को हुंकार मारा, भय भक्तों उबारा
आग्रह भक्तों ने जो कीन्हा, महाकाल ने वर था दीना
ज्योतिर्लिंग हो रहूं यंहा पर, इच्छा पूर्ण करूँ यंहा पर
जो कोई मन से मुझको पुकारे उसको दूंगा वैभव सारे
उज्जैनी राजा के पास मणि थी अद्भुत बड़ी ही ख़ास || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

जिसे छीनने का षड़यंत्र, किया था कल्यों ने ही मिलकर
मणि बचाने की आशा में, शत्रु भी कई थे अभिलाषा में
शिव मंदिर में डेरा जमाकर, खो गए शिव का ध्यान लगाकर
एक बालक ने हद ही कर दी, उस राजा की देखा देखी

एक साधारण सा पत्थर लेकर, पहुंचा अपनी कुटिया भीतर
शिवलिंग मान के वे पाषाण, पूजने लगा शिव भगवान्
उसकी भक्ति चुम्बक से, खींचे ही चले आए झट से भगवान्
ओमकार ओमकार की रट सुनकर, प्रतिष्ठित ओमकार बनकर
ओम्कारेश्वर वही है धाम, बन जाए बिगड़े वंहा पे काम
नर नारायण ए दो अवतार, भोलेनाथ को था जिनसे प्यार
पत्थर का शिवलिंग बनाकर, नमः शिवाय की धुन गाकर

शिव शंकर ओमकार का रट ले मनवा नाम
जीवन की हर राह में शिवजी लेंगे काम || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

नर नारायण ए दो अवतार, भोलेनाथ को था जिनसे प्यार
पत्थर का शिवलिंग बनाकर, नमः शिवाय की धुन गाकर
कई वर्ष तप किया शिव का, पूजा और जप किया शंकर का
शिव दर्शन को अंखिया प्यासी, आ गए एक दिन शिव कैलाशी
नर नारायण से शिव है बोले, दया के मैंने द्वार है खोले
जो हो इच्छा लो वरदान, भक्त के में है भगवान्
करवाने की भक्त ने विनती, कर दो पवन प्रभु ए धरती
तरस रहा ए जार का खंड ए, बन जाए अमृत उत्तम कुंड ए
शिव ने उनकी मानी बात, बन गया बेनी केदानाथ

मंगलदाई धाम शिव का, गूंज रहा जंहा नाम शिव का
कुम्भकरण का बेटा भीम, ब्रह्मवार का हुआ बलि असीर
इंद्रदेव को उसने हराया, काम रूप में गरजता आया
कैद किया था राजा सुदक्षण, कारागार में करे शिव पूजन
किसी ने भीम को जा बतलाया, क्रोध से भर के वो वंहा आया
पार्थिव लिंग पर मार हथोड़ा, जग का पावन शिवलिंग तोडा
प्रकट हुए शिव तांडव करते, लगा भागने भीम था डर के

डमरू धार ने देकर झटका, धरा पे पापी दानव पटका
ऐसा रूप विक्राल बनाया, पल में राक्षस मार गिराया
बन गए भोले जी प्रयलंकार, भीम मार के हुए भीमशंकर
शिव की कैसी अलौकिक माया, आज तलक कोई जान न पाया

हर हर हर महादेव का मंत्र पढ़ें हर दिन रे
दुःख से पीड़क मंदिर पा जाएगा चैन || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

परमेश्वर ने एक दिन भक्तों, जानना चाहा एक में दो को
नारी पुरुष हो प्रकटे शिवजी, परमेश्वर के रूप हैं शिवजी
नाम पुरुष का हो गया शिवजी, नारी बनी थी अम्बा शक्ति
परमेश्वर की आज्ञा पाकर, तपी बने दोनों समाधि लगाकर
शिव ने अद्भुत तेज़ दिखाया, पांच कोष का नगर बसाया

ज्योतिर्मय हो गया आकाश, नगरी सिद्ध हुई पुरुष के पास
शिव ने की तब सृष्टि की रचना, पढ़ा उस नगरों को कशी बनना
पाठ पौष के कारण तब ही, इसको कहते हैं पंचकोशी
विश्वेश्वर ने इसे बसाया, विश्वनाथ ए तभी कहलाया
यंहा नमन जो मन से करते, सिद्ध मनोरथ उनके होते
ब्रह्मगिरि पर तप गौतम लेकर, पाए कितनो के सिद्ध लेकर
तृषा ने कुछ ऋषि भटकाए, गौतम के वैरी बन आए

द्वेष का सबने जाल बिछाया, गौ हत्या का इल्जाम लगाया
और कहा तुम प्रायश्चित्त करना, स्वर्गलोक से गंगा लाना
एक करोड़ शिवलिंग लगाकर, गौतम की तप ज्योत उजागर
प्रकट शिव और शिवा वंहा पर, माँगा ऋषि ने गंगा का वर
शिव से गंगा ने विनय की, ऐसे प्रभु में यंहा न रहूंगी
ज्योतिर्लिंग प्रभु आप बन जाए, फिर मेरी निर्मल धरा बहाए
शिव ने मानी गंगा की विनती, गंगा बानी झटपट गौतमी
त्रियंबकेश्वर है शिवजी विराजे, जिनका जग में डंका बाजे

गंगा धर की अर्चना करे जो मन्चित लाए।
शिव करुणा से उनपर आंच कभी न आए || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

राक्षस राज महाबली रावण, ने जब किया शिव तप से वंदन
भए प्रसन्न शम्भू प्रगटे, दिया वरदान रावण पग पढ़के
ज्योतिर्लिंग लंका ले जाओ, सदा ही शिव शिव जय शिव गाओ
प्रभु ने उसकी अर्चन मानी, और कहा रहे सावधानी
रस्ते में इसको धरा पे न धरना, यदि धरेगा तो फिर न उठना
शिवलिंग रावण ने उठाया, गरुड़देव ने रंग दिखाया

उसे प्रतीत हुई लघुशंका, उसने खोया उसने मन का
विष्णु ब्राह्मण रूप में आए, ज्योतिर्लिंग दिया उसे थमाए
रावण निभ्यात हो जब आया, ज्योतिर्लिंग पृथ्वी पर पाया
जी भर उसने जोर लगाया, गया न फिर से उठाया
लिंग गया पाताल में उस पल, अध् अंगुल रहा भूमि ऊपर
पूरी रात लंकेश चिपकाया, चंद्रकूप फिर कूप बनाया

उसमे तीर्थों का जल डाला, नमो शिवाय की फेरी माला
जल से किया था लिंग अभिषेक, जय शिव ने भी दृश्य देखा
रत्न पूजन का उसे उन कीन्हा, नटवर पूजा का उसे वर दीना
पूजा करि मेरे मन को भावे, वैधनाथ ए सदा कहाए
मनवांछित फल मिलते रहेंगे, सूखे उपवन खिलते रहेंगे

गंगा जल जो कांवड़ लावे, भक्तजन मेरे परम पद पावे
ऐसा अनुपम धाम है शिव का, मुक्तिदाता नाम है शिव का
भक्तन की यंहा हरी बनाए, बोल बम बोल बम जो न गाए

बैधनाथ भगवान् की पूजा करो धर ध्याए
सफल तुम्हारे काज हो मुश्किलें आसान || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

सुप्रिय वैभव प्रेम अनुरागी, शिव संग जिसकी लगी थी
ताड़ प्रताड दारुक अत्याचारी, देता उसको प्यास का मारी
सुप्रिय को निर्लज्पुरी लेजाकर, बंद किया उसे बंदी बनाकर
लेकिन भक्ति छुट नहीं पाई, जेल में पूजा रुक नहीं पाई

दारुक एक दिन फिर वंहा आया, सुप्रिय भक्त को बड़ा धमकाया
फिर भी श्रद्धा हुई न विचलित, लगा रहा वंदन में ही चित
भक्तन ने जब शिवजी को पुकारा, वंहा सिंघासन प्रगट था न्यारा
जिस पर ज्योतिर्लिंग सजा था, मष्तक अश्त्र ही पास पड़ा था
अस्त्र ने सुप्रिय जब ललकारा, दारुक को एक वार में मारा

जैसा शिव का आदेश था आया, जय शिवलिंग नागेश कहलाया
रघुवर की लंका पे चढ़ाई , ललिता ने कला दिखाई
सौ योजन का सेतु बांधा, राम ने उस पर शिव आराधा
रावण मार के जब लौट आए, परामर्श को ऋषि बुलाए
कहा मुनियों ने धयान दीजौ, प्रभु हत्या का प्रायश्चित्य कीजौ
बालू काली ने सीए बनाया, जिससे रघुवर ने ए ध्याया
राम कियो जब शिव का ध्यान, ब्रह्म दलन का धूल गया पाप
हर हर महादेव जय कारी, भूमण्डल में गूंजे न्यारी

जंहा चरना शिव नाम की बहती, उसको सभी रामेश्वर कहते
गंगा जल से यंहा जो नहाए, जीवन का वो हर सख पाए
शिव के भक्तों कभी न डोलो जय रामेश्वर जय शिव बोलो

पारवती बल्ल्भ शंकर कहे जो एक मन होए
शिव करुणा से उसका करे न अनिष्ट कोई || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

देवगिरि ही सुधर्मा रहता, शिव अर्चन का विधि से करता
उसकी सुदेहा पत्नी प्यारी, पूजती मन से तीर्थ पुरारी
कुछ कुछ फिर भी रहती चिंतित, क्यूंकि थी संतान से वंचित
सुषमा उसकी बहिन थी छोटी, प्रेम सुदेहा से बड़ा करती
उसे सुदेहा ने जो मनाया, लगन सुधर्मा से करवाया

बालक सुषमा कोख से जन्मा, चाँद से जिसकी होती उपमा
पहले सुदेहा अति हर्षाई, ईर्ष्या फिर थी मन में समाई
कर दी उसने बात निराली, हत्या बालक की कर डाली
उसी सरोवर में शव डाला, सुषमा जपती शिव की माला
श्रद्धा से जब ध्यान लगाया, बालक जीवित हो चल आया
साक्षात् शिव दर्शन दीन्हे, सिद्ध मनोरथ सरे कीन्हे
वासित होकर परमेश्वर, हो गए ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर

जो चुगन लगे लगन के मोती, शिव की वर्षा उन पर होती
शिव है दयालु डमरू वाले, शिव है संतन के रखवाले
शिव की भक्ति है फलदायक, शिव भक्तों के सदा सहायक
मन के शिवाले में शिव देखो, शिव चरण में मस्तक टेको

गणपति के शिव पिता हैं प्यारे, तीनो लोक से शिव हैं न्यारे
शिव चरणन का होए जो दास, उसके गृह में शिव का निवास
शिव ही हैं निर्दोष निरंजन, मंगलदायक भय के भंजन
श्रद्धा के मांगे बिन पत्तियां, जाने सबके मन की बतियां

शिव अमृत का प्यार से करे जो निसदिन पान
चंद्रचूड़ सदा शिव करे उनका तो कल्याण || शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics ||

शिव अमृतवाणी, Shiv Amritwani Lyrics Video

शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics

आशा करता हूँ की आपको यह शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics In Hindi जरुर पसंद आया होगा अगर आपको यह शिव अमृतवाणी लिरिक्स, Shiv Amritwani Lyrics In Hindi पसंद आया हो या आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो – “कमेन्ट जरूर करें |”


Shiv Amritwani Lyrics In English

In this article, you are also being given the Hindi and English lyrics of Shiv Amritwani Lyrics and I hope that is helpful for you.

Here You Read Shiv Amritwani Lyrics in english :-

Shiv Amritwani Lyrics in english Part – 1

kalpataru punyaataama, prem sudha shiv naam
hitakaarak sanjeevanee, shiv chintan aviraam
patik paavan jaise madhur, shiv rasan ke gholak
bhakti ke hansa hee chuge, motee e anamol
jaise tanik suhaaga, sone ko chamakae
shiv sumiran se aatma, adhbhut nikharee jae
jaise chandan vrksh ko, daste nahin hai naag
shiv bhakto ke chole ko, kabhee lage na daag

om namah shivaay, om namah shivaay

daya nidhi bhooteshvar, shiv hai chatur sujaan
kan kan bheetar hai, base neel kanth bhagavaan
chandr chood ke trinetr, uma pati vishvaas
sharanaagat ke e sada, kaate sakal klesh
shiv dvaare prapanch ka, chal nahin sakata khel
aag aur paanee ka, jaise hota nahin hai mel
bhay bhanjan nataraaj hai, damaroo vaale naath
shiv ka vandhan jo kare, shiv hai unake saath

om namah shivaay, om namah shivaay

laakho ashvamedh ho, sou ganga snaan
inase uttam hai kahee, shiv charanon ka dhyaan
alakh niranjan naad se, upaje aatma gyaan
bhatake ko raasta mile, mushkil ho aasaan
amar gunon kee khaan hai, chit shuddhi shiv jaap
satsangatee mein baith kar, karalo pashchaataap
lingeshvar ke manan se, siddh ho jaate kaaj
namah shivaay ratata ja, shiv rakhenge laaj

om namah shivaay, om namah shivaay .. Shiv Amritwani Lyrics

shiv charanon ko chhoone se, tan man pavan hoe
shiv ke roop anoop kee, samata kare na koee
maha bali maha dev hai, maha prabhu maha kaal
asuraanakhandan bhakt kee, peeda hare tatkaal
sharva vyaapee shiv bhola, dharm roop sukh kaaj
amar ananta bhagavanta, jag ke paalan haar
shiv karata sansaar ke, shiv srshti ke mool
rom rom shiv ramane do, shiv na jaeeo bhool

om namah shivaay, om namah shivaay

Shiv Amritwani Lyrics in english Part – 2 and 3

Nagar me jogi aaya Lyrics

Shiv Amritwani Lyrics in english

shiv amrt kee paavan dhaara
dho detee hai har kasht hamaara
shiv ka kaary sada sada sukhadaee
shiv ke bin hai kaun sahaee
shiv kee nishadin nishadin kee jo bhakti
denge shiv har bhay se mukti
maathe dharo shiv naam naam naam kee dhulee
toot jaegee yam kee soolee soolee

shiv ka saadhak dukh na maane
shiv ko har pal sammukh jaane
saump dee jisane shiv ko dor
lute na usako paanchon chor
shiv saagar mein jo jan doobe
sankat se vah hans vah hans hans ke joojhe

shiv hai jinake sangee saathee…Shiv Amritwani Lyrics

unhen na vipada kabhee sataatee
shiv bhaktan ka pakade haath
shiv santan kee sada hee saath
shiv ne hai brahmaand rachaaya
teeno lok hai hai shiv kee maaya
jin par shiv kee karuna hotee
vah kankad ban jaate motee motee
shiv sang taan taan prem kee jodo
shiv ke charan kabhee na na kabhee na na chhodo

shiv mein manaava manaava man ko rang le
shiv mastak kee rekha badale kee rekha badale
shiv jan kee nas nas jaane
bura bhala vah sab pahachaane pahachaane
ajar amar hai shiv avinaashee
shiv poojan kiya kiya kate chauraasee
yahaan vahaan shiv sarv vyaapak
shiv kee daya ke banie yaachak
shiv ko dee jo jo dee jo jo sachchee nishtha
hone na dega shiv ko rushtha

shiv he shraddha ke hee bhookhe
bhog lage chaahe rookhe sookhe sookhe
bhaavana shiv ko bas mein karatee
preet se hee to preet hai badhatee
shiv kahate hain man se se hain man se se jaago
prem karo abhimaan tyaago
duniya ka moh tyaag shiv mein rahie leen
sukh-dukh haani laabh to shiv ke hee hai adheen
bhasm ramaiya paarvatee vallabh
shiv phaladaayak shiv hai durlabh….Shiv Amritwani Lyrics

maha kautukee hai shiv shankar
trishool dhaaree shiv abhayankar
shiv kee rachana dharatee ambar
devon ke svaamee shiv hai digambar
kaal dahan shiv rundan poshit
hone na dete dharm ko dooshit dooshit
durga pati shiv shiv giriraajanaath
dete hain sukhon kee prabhaat
srshti karta tripur dhaaree
shiv kee mahima kahee na jaatee jaatee

divya tej ke ravi ravi hai shankar
pooje ham sab tabhee hai shankar
shiv sam sab koee aur daanee
shiv kee bhakti hai kalyaanee
sabakee manorath siddh kar detee
sabakee chinta shiv har lete
bam bhola avadhoot svaroopa
shiv darshan hai ati anoopa
anukampa ka shiv hai jharana
harane vaale sab kee trshna

bhooton ke adhipati hai shankar
nirmal man shubh mati hai shankar hai shankar
kaam ke shatru bis ke naashak
shiv mahaayogee bhaee vinaashak
roodr roop shiv maha maha tejasvee
shiv ke jaisa kaun tapasvee
shiv hai jag ke srjan haare
bandhu sakha shiv isht hamaare
go braamhan ke ve hitakaaree
koee shiv sa par upakaaree
shiv karuna ke srot hai
shiv ke kariyo preet
shiv kee param puneet hai
shiv saacha man meet
shiv sarpon ke bhooshan dhaaree dhaaree
paap ke bhaashan shiv tripuraaree

jata joot shiv chandrashekhar
vishv ke rakshak kala kaleshvar
shiv kee vandana karane vaala
dhan vaibhav pa jae niraala
shiv sa dayaalu aur na dooja
kasht nivaarak shiv kee pooja
panchamukhee jab roop dikhaave
daanav dal mein bhay chha jaave
dam dam damaroo jab bhee bole
chor nishaachar ka man dole
got ghaat jab bhang chadhaave
kya hai leela samajh na aave…Shiv Amritwani Lyrics

shiv hai yogee shiv sanyaasee
shiv hee hai kailaash ke vaasee
shiv ka daas sada nirbheek hai
shiv ke dhaam bade ramaneek
shiv bhrkuti se bhairav janme
shiv kee moorat rakho man mein
shiv ka archan mangalakaaree
mukti saadhak bhav bhay haaree haaree

bhaktavatsal deen dayaala
gyaan sudha hai shiv krpaala
shiv naam kee nauka hai nyaaree
jisane sabakee chinta taaree
jeevan sindhu sahaj jo tarana
shiv ka har pal naam sumirana
taarakaasur ko maarane vaale
shiv hai bhakton ke rakhavaale rakhavaale
shiv kee leela ke gun gaana
shiv ko bhoolakar na bisara na

andhakaasur ke dev dev bachae
shiv ke adbhut khel dikhae
shiv charanon se lipate rahie
mukh ke shiv shiv jay shiv kahie
bhasmaasur ko var de daala
shiva hai kaisa bhola bhaala
shiv teerth ka darshan keejo
manachaahe var shiv se leejo
shiv shankar ke jaap se mit jaate sab rog
shiv ka anugrah hote hee peeda na dete shok
brahma vishnu shiv anugaamee
shiv hai deen hin ke svaamee…Shiv Amritwani Lyrics

nirbal ke bal roop hain shambhu
pyaase ko jal roop hai shambhoo
raavan shiv ka bhakt niraala
shiv ne dee das sheesh kee maala
garv se jab kailaash uthaaya
shiv ne angoothe se tha daba
dukh nivaaran naam hai shiv ka
ratn hai aur bin daam shiv ka

shiv hai sab ke bhaagy vidhaata ke bhaagy vidhaata
shiv ka sumiran sumiran hai phal daata
mahaadev shiv aughad daanee
baayen ang mein saje bhavaanee
shiv shakti ka mel ka mel niraala
shiv ka har ek khel niraala
sambhar naamee bhakton ko taara taara ko taara taara
chandrasen ka shok nivaaran
pingala ne jab shiv ko dhyaaya
deh chhuttee aur moksh paaya paaya
gokarn ki chan chooka anaaree
bhavasaagar se paar utaar

anusuiya ne kiya aaraadhana
toote chinta ke sab sab bandhan
bel patton se pooja karen chandalee
shiv kee anukampa huee niraalee
maarkandey kee bhakti hai shiv
durvaasa kee shakti hai shiv
raam prabhu ne shiv araadha
setu kee har tal gaee baadha

dhanush baan tha paaya shiv ne
shree krshn ne tha jab dhyaaya
das putron ka var tha paaya
ham sevak to svaamee shiv hai hai
anahad antaryaamee shiv hai
deen dayaal shiv mere, shiv ke rahiyo daas
ghaat ghaat kee shiv jaanate shiv par rakh vishvaas
parashuraam ne shiv gun gaaya gaaya
keenha tap aur pharasa paaya
nirgun bhee shiv niraakaar
shiv hain srshti ke aadhaar…Shiv Amritwani Lyrics

shiv hee hote moortimaan
shiv hee karate jag kalyaan
shiv mein vyaapak duniya saaree
shiv kee siddhi hai bhayahaaree
shiv hee baahar se hee andar
shiv kee rachana saat samundar
shiv hai har ek har ek ke man ke bheetar
shiv har ek kan kan ke bheetar
tan mein baitha shiv hee bole
dil kee dhadakan mein shiv dole

ham kathaputalee shiv hee nachaata
naino ko par najar na aata
maatee ke rangadaar khilaune
saanval sundar aur salonee
shiv ho jode shiv ho tode
shiv to kisee ko khula na chhode
aatma shiv paramaatma shiv hai hai
daya bhaav dharmaatma shiv hai
shiv jee deepak shiv hee baatee
shiv jo nahin to sab kuchh maatee

sab devon mein jeshth shiv hai
sakal gunon mein shreshth shiv hai hai
jab yah taandav karane lagata
brahmaand saara dar nahin lagata
teesara chachhu jab-jab kholen
traahi-traahi jab jag bole
shiv ko tum prasann hee rakhana
aastha lagn banae rakhana
vishnu ne kee shiv shiv kee pooja
kamal chadhaoon man mein sujha

ek kamal jo kam tha paaya
apana sundar nayan chadaaya
saakshaat tab shiv the aae
kamalanayan vishnu kahalae kahalae
indradhanush ke rangon mein shiv
santon ke satsangon mein shiv
mahaakaal ke bhakt ko maar na sakata kaal
dvaar khade yamaraaj ko shiv dete taal
yagy sudan maha raudr shiv hai
aanandamoorti natavar shiv hai hai

shiv hee hai shmashaan ke vaasee
shiv kaante mrtyulok kee phaansee
vyaaghr charam kamar mein sohe
shiv bhakton ke man ko mohe
nandee gan par kare savaaree
aadity naath shiv ganga dhaaree
kaal mein bhee to kaal hai shankar hai shankar
vishadhaaree gaj paalak hai shankar
maha satee ke pati hai shankar
deen sakha shubh mati hai shankar

laakhon shashi ke sam mukh vaale
bhang dhatoore ke matavaale
kaal bhairav bhooton ke svaamee
shiv se kaampe sab phalagaamee
shiv kapaalee shiv bhasmaagee
shiv kee daya har jeev ne maangee
mangalakarta mangalahaaree
dev shiromani mahaasukhakaaree
jal tatha vilv kare jo arpan
shradha bhaav se kare samarpan
shiv sada unakee karate raksha
satyakarm kee dete shiksha

baasuki naag kanth kee shobha
aashutosh hai shiv mahaadeva
vishvamurti karunaanidhaan
maha mrtyunjay shiv bhagavaan
shiv dhaare rudraaksh kee maala
neeleshvar shiv damaroo vaala
paap ka shodhak mukti saadhan
shiv karate nirdee ka mardan
shiv sumarin ke neer se dhool jaate paap
pavan chale naam kee udate duhkh santaap

panchaakshar ka mantr shiv hai
saakshaat sarveshvar shiv hai
shiv ko naman kare jag saara
siv ka hai e sakal pasaara
ksheer saagar ko mathane vaale
ridhiseedhee sukh dene vaale
ahankaar ke shiv hai vinaashak
dharm deep jyoti prakaashak
shiv bichhuvan ke kundaladhaaree
shiv kee maaya srshti saaree….Shiv Amritwani Lyrics

mahaananda ne kiya siv chintan
rudraaksh maala kinhee dhaaran
bhavasindhu se shiv ne taara
shiv anukampa aparampaara
tri jagat ke yash hai shivajee
divy tej gaureesh hai shivajee
mahaabhaar ko sahane vaale
vair rahit daya karane vaale
gun svaroop hai shiv anupa
ambaanaath hai shiv taparoopa

shiv chandeesh param sukh jyoti
shiv karuna ke ujjaval motee
punyaatma shiv yogeshvar
mahaadayaalu siv sharaneshvar
shiv charanan pe mastak dharie
shradha bhaav se archan karie
man ko shivaala roop bana lo
rom rom mein shiv ko rama lo
dashon dishaon mein shiv drshti
sab par siv kee krpa drshti

siv ko sada hee sammukh jaano
kan-kan beech base hee maano
shiv ko saumpo jeevan naiya
shiv hai sankat taal khivaiya
anjali baandh kare jo vandan
bhay janjaal ke toote bandhan

jinakee raksha shiv kare, maare na usako koy
aag kee nadiya se bache, baal na baanka hoy
shiv daata bhola bhandaaree
shiv kailaashee kala bihaaree
sagun brahm kalyaan karta
vighn vinaashak baadha harta
shiv svaroopinee srshti saaree
shiv se prthvee hai ujiyaaree…Shiv Amritwani Lyrics

gagan deep bhee maaya shiv kee
kaamadhenu hai chhaaya shiv kee
ganga mein shiv , shiv me ganga
shiv ke taare turat kusanga
shiv ke kar mein saje trishoola
shiv ke bina e jag nirmoola
.svarnamee shiv jata niraalee
shiv shambhoo kee chhata niraalee
jo jan shiv kee mahima gae
shiv se phal manavaanchhit pae
shiv pag pankaj savarg samaana
shiv pae jo taje abhimaana

shiv ka bhakt na duhkh me dolen
shiv ka jaadoo sir chadh bole
paramaanand anant svaroopa
shiv kee sharan pade sab koopa
shiv kee japiyo har pal maala
shiv kee najar me teeno qaala
antar ghat me ise basa lo
divy jot se jot mila lo
nam: shivaay jape jo svaasa
pooreen ho har man kee aasa

paramapita paramaatma pooran sachchidaanand
shiv ke darshan se mile sukhadaayak aanand
shiv se bemukh kabhee na hona
shiv sumiran ke motee pirona
jisane bhajan hai shiv ke seekhe
usako shiv har jagah hee dikhe
preet mein shiv hai shiv mein preetee
shiv sammukh na chale aneeti

shiv naam kee madhur sugandhee
jisane mast kiyo re nandee
shiv nirmal nirdosh sanjay niraale
shiv hee apana virad sambhaale
param purush shiv gyaan puneeta
bhakto ne shiv prem se jeeta
aantho pahar araadheey jyotirling shiv roop
nayanan beech basaie shiv ka roop anoop
ling may saara jagat hain
ling dharatee aakaash
ling chintan se hot hain sab paapo ka naash
ling pavan ka veg hain
ling agni kee jyot
ling se paataal hain ling varun ka strot

ling se hain vanaspati
ling hee hain phal phool
ling hee ratn svaroop hain
ling maatee nirdhoop
ling hee jeevan roop hain
ling mrtyulingakaar
ling megha ghanaghor hain
ling hee hain upachaar
jyotirling kee saadhana karate hain teeno log
ling hee mantr jaap hain
ling ka room shlok
ling se bane puraan
ling vedo ka saar
ridhiya siddhiya ling hain
ling karata karataar….Shiv Amritwani Lyrics

praatakaal ling poojie poorn ho sab kaaj
ling pe karo vishvaas to ling rakhenge laaj
sakal manorath se hot hain dukho ka ant
jyotirling ke naam se sumirat jo bhagavant
maanav daanav rshimuni jyotirling ke daas
sarv vyaapak ling hain pooree kare har aas
shiv rupee is ling ko pooje sab avataar
jyotirlingon kee daya sapane kare saakaar
ling pe chadhane vaidy ka jo jan le parasaad
unake hraday mein baje… shiv karoona ka naad
mahima jyotirling kee jaenge jo log
bhay se mukti paenge rog rahe na shob

shiv ke charan saroj too jyotirling mein dekh
sarv vyaapee shiv badale bhaagy teere
daareen jyotirling pe ganga jal kee dhaar
karenge gangaadhar tujhe bhav sindhu se paar
chit siddhi ho jae re lingo ka kar dhyaan
ling hee amrt kalash hain ling hee daya nidhaan

om namah shivaay, om namah shivaay..

Shiv Amritwani Lyrics in English Part – 4 and 5

शिव अमृतवाणी लिरिक्स,  Shiv Amritwani Lyrics

Shiv Amritwani Lyrics in English

jyotirling hai shiv kee jyoti, jyotirling hai daya ka motee
jyotirling hai ratnon kee khaan, jyotirling mein rama jahaan
jyotirling ka tez niraala, dhan sampati dene vaala
jyotirling mein hai nat naagar, amar gunon ka hai e saagar
jyotirling kee kee jo seva, gyaan paan ka paoge meva
jyotirling hai pita saamaan, sashti isakee hai santaan

jyotirling hai isht pyaare, jyotirling hai sakha hamaare
jyotirling hai naareeshvar, jyotirling hai shiv vimaleshvar
jyotirling gopeshvar daata, jyotirling hai vidhi vidhaata
jyotirling hai sharrendashvar svaamee, jyotirling hai antaryaamee
satayug mein ratno se shobhit, dev jaano ke man ko mohit

jyotirling hai atyant sundar, chhatta isakee brahmaand andar
treta yug mein svarn sajaata, sukh sooraj e dhyaan dhvajaata
sakl srshti man kee karatee, nisadin pooja bhajan bhee karatee
dvaapar yug mein paaras nirmit, gunee gyaanee sur nar sevee
jyotirling sabake man ko bhaata, mahamaarak ko maar bhagaata

kalayug mein paarthiv kee moorat, jyotirling nandakeshvar soorat
bhakti shakti ka varadaata, jo daata ko hans banata
jyotirling par pushp chadhao, kesar chandan tilak lagao
jo jaan karen doodh ka arpan, ujale ho unake man darpan

jyotirling ke jaap se tan man nirmal hoe
isake bhakton ka manava kare na vichalit koee

somanaath sukh karane vaala, som ke sankat harane vaala
daksh shraap se som chhudaaya, som hai shiv kee adbhut maaya
chandr dev ne kiya jo vandan, som ne kaate duhkh ke bandhan
jyotirling hai sada sukhadaee, deen heen ka sahaee
bhakti bhaav se ise jo dhyae, man vaanee sheetal tar jae

shiv kee aatma roop som hai prabhu paramaatma roop som hai
yanha upaasana chandr ne kee, shiv ne usakee chinta har lee
isake rath kee shobha nyaaree, shiv amrt saagar bhavabhayadhaaree
chandr kund mein jo bhee nahae, paap se ve jan mukti pae
6 kushth sab rog mitae, naaya kundan pal mein banaave
malikaarjun hai naam nyaara, shiv ka paavan dhaam pyaara
kaartikey hai jab shiv se roothe, maata pita ke charan hai chhoote
shree shailesh parvat ja pahunche, kasht bhay paarvatee ke man mein
prabhu kumaar se chalee jo milane, sang chalana maana shankar ne
shree shailesh parvat ke oopar, gae jo donon uma maheshvar

unhen dekhakar kaartikey uth bhaage, aur umaar parvat par viraaje
janha shrit hue paaravatee shankar, kaam banaave shiv ka sundar
shiv ka arjan naam suhaata, malika hai meree paaravatee maata
ling roop ho jahaan bhee rahate, malikaarjun hai usako kahate
manavaanchhit phal dene vaala, nirbal ko bal dene vaala

jyotirling ke naam kee le man maala pher
manokaamana pooree hogee lage na chin bhee der

ujjain kee nadee kshipra kinaare, braahman the shiv bhakt nyaare
dooshan daity sataata nisadin, garm dvesh dikhalaata jis din
ek din nagaree ke nar naaree, dukhee ho raakshas se atihaaree
param siddh braahman se bole, daity ke dar se har koee dole
dusht nisaachar chhutakaara, paane ko yagy pyaara
braahman tap ne rang dikhae, prthvee phaad mahaakaal aae

raakshas ko hunkaar maara, bhay bhakton ubaara
aagrah bhakton ne jo keenha, mahaakaal ne var tha deena
jyotirling ho rahoon yanha par, ichchha poorn karoon yanha par
jo koee man se mujhako pukaare usako doonga vaibhav saare
ujjainee raaja ke paas mani thee adbhut badee hee khaas
jise chheenane ka shadayantr, kiya tha kalyon ne hee milakar
mani bachaane kee aasha mein, shatru bhee kaee the abhilaasha mein
shiv mandir mein dera jamaakar, kho gae shiv ka dhyaan lagaakar
ek baalak ne had hee kar dee, us raaja kee dekha dekhee

ek saadhaaran sa patthar lekar, pahuncha apanee kutiya bheetar
shivaling maan ke ve paashaan, poojane laga shiv bhagavaan
usakee bhakti chumbak se, kheenche hee chale aae jhat se bhagavaan
omakaar omakaar kee rat sunakar, pratishthit omakaar banakar
omkaareshvar vahee hai dhaam, ban jae bigade vanha pe kaam
nar naaraayan e do avataar, bholenaath ko tha jinase pyaar
patthar ka shivaling banaakar, namah shivaay kee dhun gaakar

shiv shankar omakaar ka rat le manava naam
jeevan kee har raah mein shivajee lenge kaam…Shiv Amritwani Lyrics

nar naaraayan e do avataar, bholenaath ko tha jinase pyaar
patthar ka shivaling banaakar, namah shivaay kee dhun gaakar
kaee varsh tap kiya shiv ka, pooja aur jap kiya shankar ka
shiv darshan ko ankhiya pyaasee, aa gae ek din shiv kailaashee
nar naaraayan se shiv hai bole, daya ke mainne dvaar hai khole
jo ho ichchha lo varadaan, bhakt ke mein hai bhagavaan
karavaane kee bhakt ne vinatee, kar do pavan prabhu e dharatee
taras raha e jaar ka khand e, ban jae amrt uttam kund e
shiv ne unakee maanee baat, ban gaya benee kedaanaath

mangaladaee dhaam shiv ka, goonj raha janha naam shiv ka
kumbhakaran ka beta bheem, brahmavaar ka hua bali aseer
indradev ko usane haraaya, kaam roop mein garajata aaya
kaid kiya tha raaja sudakshan, kaaraagaar mein kare shiv poojan
kisee ne bheem ko ja batalaaya, krodh se bhar ke vo vanha aaya
paarthiv ling par maar hathoda, jag ka paavan shivaling toda
prakat hue shiv taandav karate, laga bhaagane bheem tha dar ke

damaroo dhaar ne dekar jhataka, dhara pe paapee daanav pataka
aisa roop vikraal banaaya, pal mein raakshas maar giraaya
ban gae bhole jee prayalankaar, bheem maar ke hue bheemashankar
shiv kee kaisee alaukik maaya, aaj talak koee jaan na paaya

har har har mahaadev ka mantr padhen har din re
duhkh se peedak mandir pa jaega chain
parameshvar ne ek din bhakton, jaanana chaaha ek mein do ko
naaree purush ho prakate shivajee, parameshvar ke roop hain shivajee
naam purush ka ho gaya shivajee, naaree banee thee amba shakti
parameshvar kee aagya paakar, tapee bane donon samaadhi lagaakar
shiv ne adbhut tez dikhaaya, paanch kosh ka nagar basaaya

jyotirmay ho gaya aakaash, nagaree siddh huee purush ke paas
shiv ne kee tab srshti kee rachana, padha us nagaron ko kashee banana
paath paush ke kaaran tab hee, isako kahate hain panchakoshee
vishveshvar ne ise basaaya, vishvanaath e tabhee kahalaaya
yanha naman jo man se karate, siddh manorath unake hote
brahmagiri par tap gautam lekar, pae kitano ke siddh lekar
trsha ne kuchh rshi bhatakae, gautam ke vairee ban aae

dvesh ka sabane jaal bichhaaya, gau hatya ka iljaam lagaaya
aur kaha tum praayashchitt karana, svargalok se ganga laana
ek karod shivaling lagaakar, gautam kee tap jyot ujaagar
prakat shiv aur shiva vanha par, maanga rshi ne ganga ka var
shiv se ganga ne vinay kee, aise prabhu mein yanha na rahoongee
jyotirling prabhu aap ban jae, phir meree nirmal dhara bahae
shiv ne maanee ganga kee vinatee, ganga baanee jhatapat gautamee
triyambakeshvar hai shivajee viraaje, jinaka jag mein danka baaje

ganga dhar kee archana kare jo manchit lae.
shiv karuna se unapar aanch kabhee na aae..Shiv Amritwani Lyrics

raakshas raaj mahaabalee raavan, ne jab kiya shiv tap se vandan
bhe prasann shambhoo pragate, diya varadaan raavan pag padhake
jyotirling lanka le jao, sada hee shiv shiv jay shiv gao
prabhu ne usakee archan maanee, aur kaha rahe saavadhaanee
raste mein isako dhara pe na dharana, yadi dharega to phir na uthana
shivaling raavan ne uthaaya, garudadev ne rang dikhaaya

use prateet huee laghushanka, usane khoya usane man ka
vishnu braahman roop mein aae, jyotirling diya use thamae
raavan nibhyaat ho jab aaya, jyotirling prthvee par paaya
jee bhar usane jor lagaaya, gaya na phir se uthaaya
ling gaya paataal mein us pal, adh angul raha bhoomi oopar
pooree raat lankesh chipakaaya, chandrakoop phir koop banaaya

usame teerthon ka jal daala, namo shivaay kee pheree maala
jal se kiya tha ling abhishek, jay shiv ne bhee drshy dekha
ratn poojan ka use un keenha, natavar pooja ka use var deena
pooja kari mere man ko bhaave, vaidhanaath e sada kahae
manavaanchhit phal milate rahenge, sookhe upavan khilate rahenge

ganga jal jo kaanvad laave, bhaktajan mere param pad paave
aisa anupam dhaam hai shiv ka, muktidaata naam hai shiv ka
bhaktan kee yanha haree banae, bol bam bol bam jo na gae

baidhanaath bhagavaan kee pooja karo dhar dhyae
saphal tumhaare kaaj ho mushkilen aasaan…Shiv Amritwani Lyrics

supriy vaibhav prem anuraagee, shiv sang jisakee lagee thee
taad prataad daaruk atyaachaaree, deta usako pyaas ka maaree
supriy ko nirlajpuree lejaakar, band kiya use bandee banaakar
lekin bhakti chhut nahin paee, jel mein pooja ruk nahin paee

daaruk ek din phir vanha aaya, supriy bhakt ko bada dhamakaaya
phir bhee shraddha huee na vichalit, laga raha vandan mein hee chit
bhaktan ne jab shivajee ko pukaara, vanha singhaasan pragat tha nyaara
jis par jyotirling saja tha, mashtak ashtr hee paas pada tha
astr ne supriy jab lalakaara, daaruk ko ek vaar mein maara

jaisa shiv ka aadesh tha aaya, jay shivaling naagesh kahalaaya
raghuvar kee lanka pe chadhaee , lalita ne kala dikhaee
sau yojan ka setu baandha, raam ne us par shiv aaraadha
raavan maar ke jab laut aae, paraamarsh ko rshi bulae
kaha muniyon ne dhayaan deejau, prabhu hatya ka praayashchity keejau
baaloo kaalee ne seee banaaya, jisase raghuvar ne e dhyaaya
raam kiyo jab shiv ka dhyaan, brahm dalan ka dhool gaya paap
har har mahaadev jay kaaree, bhoomandal mein goonje nyaaree

janha charana shiv naam kee bahatee, usako sabhee raameshvar kahate
ganga jal se yanha jo nahae, jeevan ka vo har sakh pae
shiv ke bhakton kabhee na dolo jay raameshvar jay shiv bolo

paaravatee ballbh shankar kahe jo ek man hoe
shiv karuna se usaka kare na anisht koee…Shiv Amritwani Lyrics

devagiri hee sudharma rahata, shiv archan ka vidhi se karata
usakee sudeha patnee pyaaree, poojatee man se teerth puraaree
kuchh kuchh phir bhee rahatee chintit, kyoonki thee santaan se vanchit
sushama usakee bahin thee chhotee, prem sudeha se bada karatee
use sudeha ne jo manaaya, lagan sudharma se karavaaya

baalak sushama kokh se janma, chaand se jisakee hotee upama
pahale sudeha ati harshaee, eershya phir thee man mein samaee
kar dee usane baat niraalee, hatya baalak kee kar daalee
usee sarovar mein shav daala, sushama japatee shiv kee maala
shraddha se jab dhyaan lagaaya, baalak jeevit ho chal aaya
saakshaat shiv darshan deenhe, siddh manorath sare keenhe
vaasit hokar parameshvar, ho gae jyotirling ghushmeshvar

jo chugan lage lagan ke motee, shiv kee varsha un par hotee
shiv hai dayaalu damaroo vaale, shiv hai santan ke rakhavaale
shiv kee bhakti hai phaladaayak, shiv bhakton ke sada sahaayak
man ke shivaale mein shiv dekho, shiv charan mein mastak teko

ganapati ke shiv pita hain pyaare, teeno lok se shiv hain nyaare
shiv charanan ka hoe jo daas, usake grh mein shiv ka nivaas
shiv hee hain nirdosh niranjan, mangaladaayak bhay ke bhanjan
shraddha ke maange bin pattiyaan, jaane sabake man kee batiyaan

shiv amrt ka pyaar se kare jo nisadin paan
chandrachood sada shiv kare unaka to kalyaan ||

Jata Mein Teri Ganga Viraje Lyrics

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धन्यवाद्
पवन शास्त्री ( सुर सरिता टेक्नो )

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